Tuesday, 20 November 2018, 5:47 AM

जीवन मंत्र

 मन के साधे सब सधे

Updated on 18 November, 2018, 9:15
यूं तो सामान्यजन के लिए मन को जीत पाना कठिन ही होता है पर मुश्किल नही। बिना मन को जीते जीवन में शांति सम्भव नहीं है। अशांति का कारण हमारी असीमित इच्छाएं ही हैं और इसके मूल में कोई बाहरी तत्व नहीं होता बल्कि हमारा अपना मन ही हैं। अन्य... आगे पढ़े

अन्न के कण और आनंद के क्षण

Updated on 16 October, 2018, 9:15
महाकवि कालिदास रास्ते में थे। प्यास लगी। वहां एक पनिहारिन पानी भर रही थी। कालिदास बोले : माते! पानी पिला दीजिए बड़ा पुण्य होगा। पनिहारिन बोली : बेटा, मैं तुम्हें जानती नहीं। अपना परिचय दो। मैं पानी पिला दूंगी।  कालिदास ने कहा : मैं मेहमान हूं, कृपया पानी पिला दें।... आगे पढ़े

 भारतीय शिक्षा पद्धति में दंड का वैज्ञानिक महत्त्व

Updated on 22 September, 2018, 9:37
प्राच्यविद्या  एक दृष्टिकोण यह सज़ा मास्टर जी क्यों देते हैँ, ये शायद उन्हें खुद भी नहीं मालुम होगा....... आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ये सज़ा भारत में प्राचीन गुरुकुल शिक्षा पद्धति के समय से चली आ रही है. तब यह सिर्फ उन बच्चों की दी जाती थी जो पढ़ाई में कमज़ोर... आगे पढ़े

मनुष्य के लिए इस जीवन में सबसे जरूरी हैं ये चीजें, देखिए क्या आपके पास है…

Updated on 8 September, 2018, 8:20
जीवन का अर्थ सिर्फ जन्म लेना और मरना नहीं है। यह क्रम तो हम अतीत में अनगिनत बार निभाते रहे हैं। जीवन वही सार्थक है जिसमें हम मनुष्य बनकर जिएं। मनुष्य देवता बनना चाहता है। मनुष्य का देवता होना कोई बड़ी बात नहीं है। देवता स्वयं चाहते हैं कि वह... आगे पढ़े

स्वयं को श्रेष्ठ समझना भी है अहंकार

Updated on 7 September, 2018, 10:45
ईश्वर ने जब संसार की रचना की तब उसने सभी जीवों में एक समान रक्त का संचार किया। इसलिए मनुष्य हो अथवा पशु सभी के शरीर में बह रहा खून का रंग लाल है। विभिन्न योनियों की रचना भी इसलिए की ताकि मनुष्य कभी इस बात का अहंकार न करें... आगे पढ़े

पैसे से अधिक महत्वपूर्ण है यह एक चीज, ऋषि ने पत्नी को बताया प्राप्ति का उपाय

Updated on 17 August, 2018, 6:40
प्रस्तुति: अर्चना झा इस भौतिकतावादी युग में हमारे जीवन की सभी क्रियाएं धन उपार्जन पर केंद्रित हैं। धन प्राप्ति के लिए हम कई बार अपनी आत्मा के स्वर को दबाकर गलत कार्य भी करते हैं, इसलिए धन तो हम अर्जित कर लेते हैं पर मन की शांति कहीं खो जाती है।... आगे पढ़े

बस दो मिनट सोचों

Updated on 12 August, 2018, 11:30
एक युवक ने विवाह के दो साल बाद परदेस जाकर व्यापार करने की इच्छा पिता से कही । पिता ने स्वीकृति दी तो वह अपनी गर्भवती पत्नी को माँ-बाप के जिम्मे छोड़कर व्यापार करने चला गया । परदेश में मेहनत से बहुत धन कमाया और वह धनी सेठ बन गया । सत्रह वर्ष धन कमाने में बीत गए... आगे पढ़े

अंदर ही मौजूद शक्ति को इस तरह पहचानें

Updated on 27 July, 2018, 8:20
दुनिया में सर्वत्र शक्ति की पूजा होती है। विडंबना यह है कि हर कोई विध्वंस को ही शक्ति मान रहा है, जबकि सबसे बड़ी शक्ति अध्यात्म है, आत्मा है। इंसान सबसे शक्तिशाली है। एक भी ऐसा प्राणी नहीं है जिसमें शक्ति न हो। यह सत्य भारत के अध्यात्म में ही... आगे पढ़े

इस चीज से इंसान निकल आए, फिर देखो जिंदगी की खूबसूरती

Updated on 9 June, 2018, 9:00
स्वामी अवधेशानन्द गिरि इच्छापूर्ति करने में मनुष्य का संपूर्ण जीवन नष्ट हो जाता है और वह इसके फंदे में फंसा का फंसा रह जाता है। इस चक्र से बाहर निकलने के लिए मनुष्य को गहराई से चिंतन-मनन करना चाहिए न कि चिंता। कारण कि जीवन के इसी मोड़ पर चिंतन-मनन की... आगे पढ़े

ऐसा होने पर मृत्यु से पहले ही मौत आ जाती है: ओशो

Updated on 8 June, 2018, 9:00
कामवासना का देवता शक्तिशाली नहीं है, तुम दुर्बल हो। इस बात को ठीक से स्मरण रखो कि कामवासना का देवता वाकई शक्तिशाली नहीं है। …और अगर तुम गिर गए हो तो उसकी शक्ति के कारण नहीं गिरे हो। तुम गिरे हो अपनी दुर्बलता के कारण। जैसे कि कोई सूखा जड़... आगे पढ़े

मरने से डर लगता तो आप ये गलतियां कर रहे हैं

Updated on 7 June, 2018, 9:00
दुनिया के किसी भी कोने में, किसी भी मजहब, जाति, उम्र और किसी भी लिंग के मनुष्य से यह पूछा जाए कि उसका सबसे बड़ा भय क्या है तो निस्संदेह उसका एक ही उत्तर होगा- मृत्यु! उसके क्षणिक विचार मात्र से ही हम कांप उठते हैं। इसका मतलब हम यही... आगे पढ़े

केवल यह काम आपकी जिंदगी को आसान और खुशनुमा बना देगा

Updated on 5 June, 2018, 9:00
आचार्य लोकेशमुनि जीवन में धूप-छांव, हर्ष-विषाद, उतार-चढ़ाव का क्रम चलता रहता है। जीवन की विषम स्थितियों में दिक्कतों को झेलने में वही समर्थ होता है, जिसकी जड़ें गहरी हैं। हर आदमी को यह चिंतन करना है कि जड़ मजबूत कैसे हो? केवल पत्तों पर, फूलों पर इतराएं नहीं। ऊपर की ऊंचाई... आगे पढ़े

जन्म के वक्त जो आत्मा होती है, मृत्यु के वक्त वह नहीं होती: ओशो

Updated on 2 June, 2018, 7:20
बुद्ध ने कहा, ऐसा कुछ भी नहीं है। चीजें हो रही हैं। बुद्ध ने जो प्रतीक लिया है जीवन को समझाने के लिए, वह है दीए की ज्योति। सांझ को तुम दीया जलाते हो। रातभर दीया जलता है, अंधेरे से लड़ता है। सुबह तुम दीया बुझाते हो। क्या तुम वही... आगे पढ़े

सफल होना है तो यहां फुलस्टॉप लगाना जरूरी है

Updated on 31 May, 2018, 9:00
इच्छा, आशा, अपेक्षा, आकांक्षा- ये ही हमारे समाज की चालक शक्तियां होती हैं। इच्छाएं ही हमारे जीवन की व्याख्या भी करती हैं। कुछ पाने से आती सफलता या कुछ न पाने से आती विफलता ही हमारा परिचय होती हैं। इच्छाओं और आशाओं में रचे-बसे हमारे समाज में अधिकतर लोग इन्हें... आगे पढ़े

दैवीय चमत्कार देखना है, जीवन में लाएं इस तरह का परिवर्तन

Updated on 25 May, 2018, 7:00
सीताराम गुप्ता किसी का आदर-सत्कार करने से पहले यह सोचना कि इसका आदर-सत्कार करूं या न करूं, अज्ञानता है। किसी का आदर-सत्कार करना मिट्टी में फूलों के बीज डालने जैसा ही है। एक बार मिट्टी में बीज चला गया तो हम चाहें या न चाहें प्रकृति उन बीजों को पल्लवित-पुष्पित करके... आगे पढ़े

यही है जीवन का सार

Updated on 21 May, 2018, 16:00
अपने जमाने के महान सूफी संत हसन के पास एक बार एक व्यक्ति आया और बोला, ‘मुझे आप जीवन का सार बताइए, मैं जीवन दर्शन का इच्छुक हूं।' यह सुन संत हसन ने जवाब दिया कि ‘यहां से थोड़ी दूर एक कब्रिस्तान है, वहां जाओ और कब्रों में सोए लोगों... आगे पढ़े

ये अनमोल सूत्र देंगे ऊर्जा व शांति

Updated on 7 April, 2018, 7:20
शांति, शांति, शांति तीन बार शांति कहने से मन मस्तिष्क को शांति मिलती है, यह शास्त्रों में वर्णित शब्द है, लेकिन शांति को पाने के लिए तीन बार शांति कह देना मात्र पर्याप्त नहीं है। शांति एक संस्कार है, एक वैचारिक शक्ति है, एक स्थिर अनुभूति है, जिसे प्राप्त करने... आगे पढ़े

आप की जिंदगी से मिला-जुला, जानें क्या है याददाश्त तेज करने का फाॅर्मुला

Updated on 7 March, 2018, 7:40
उन दिनों की बात है कि जब स्वामी विवेकानंद देश का भ्रमण कर रहे थे और उनके साथ उनता गुरू भाई थे। स्वाध्याय, सत्संग और कठोर तप का अविराम सिलसिला चल रहा था। जिस जगह भी उन्हें कोई अच्छा ग्रंथ व पुराण आजि मिलता वे उन्हें पढ़ना बिना छोड़ते नहीं।... आगे पढ़े

ये एक बुरी आदत, करती है संसार के सबसे बड़े सुख से दूर

Updated on 3 March, 2018, 8:00
परमात्मा हर पल व हर जगह हमारे अंग-संग है परंतु हमारा अहंकार और हमारी अज्ञानता हमें उसे देखने ही नहीं देते। समाज में रहते हुए हमें अनेक काम करने पड़ते हैं। हमारी जाति, हमारा काम-धंधा, हमारा सामाजिक रुतबा, हमारी धन-दौलत, हमारी वास्तविक पहचान नहीं हैं बल्कि ये सब हमारे सामाजिक... आगे पढ़े

स्वयं के भीतर पैदा करें यह भाव, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मिलेगी सफलता

Updated on 21 February, 2018, 7:40
मुश्किलों को आगे बढने का माध्यम बनाएं आप कभी किसी बहती हुई नदी को देखेंगे तो पाएंगे कि वह निरंतर आगे बढ़ती रहती है, जब तक कि वह सागर से न मिल जाए। हां, रास्ते में बहुत-सी रुकावटों को पार करना पड़ता है, तब कहीं जाकर समुद्र से एकत्व प्राप्त... आगे पढ़े

सदैव दूसरों के प्रति मन में रखें सेवाभाव

Updated on 16 January, 2018, 7:20
मदर टेरेसा जिन्हें रोमन कैथोलिक चर्च द्वारा कलकत्ता की संत टेरेसा के नाम से नवाजा गया है, का जन्म अग्नेसे गोंकशे बोजशियु के नाम से एक अल्बेनीयाई परिवार में उस्कुब, उस्मान साम्राज्य में हुआ था। मदर टेरसा रोमन कैथोलिक नन थीं, जिन्होंने 1948 में स्वेच्छा से भारतीय नागरिकता ले ली... आगे पढ़े

स्वयं से स्वयं का उद्धार करना चाहिए, तपन नहीं

Updated on 12 January, 2018, 8:00
पके हृदय के द्वार बड़ी आसानी से छोटी-छोटी कुंजियों से खुल जाएंगे, उनमें से एक कुंजी है ‘धन्यवाद’ कहना और दूसरी कुंजी ‘कृपया’ कहना। तात्पर्य यह है कि व्यक्ति अपनी शालीनता, विनम्रता, सरलता का परिचय इन उद्गारों से दे सकता है। विनम्रता और कुलीनता किसी भी व्यक्ति के शृंगार के... आगे पढ़े

कोई भी कार्य से पहले परिणाम के बारे में कर लें विचार

Updated on 7 January, 2018, 9:00
बहुत पुराने समय की बात है। चार विद्वान ब्राह्मण मित्र थे। एक दिन चारों ने संपूर्ण देश का भ्रमण कर हर प्रकार का ज्ञान अर्जित करने का निश्चय किया। चारों ब्राह्मणों ने चार दिशाएं पकड़ीं और अलग-अलग स्थानों पर रहकर अनेक प्रकार की विद्याएं सीखीं। पांच वर्ष बाद चारों अपने... आगे पढ़े

दुश्मन से भी करें ऐसा व्यवहार कि वो बन जाए आपका मित्र

Updated on 4 January, 2018, 7:00
आप कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता आपसे दूर-दूर रहती है। आप सोचते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है लेकिन समझ नहीं पाते। हम आपको बता दें कि असफलता का स्वाद चखे बिना सफलता के सुख को कभी नहीं समझा जा सकता। लेकिन कई महाज्ञानी लोगों की मानें तो... आगे पढ़े

शास्त्रानुसार ये 5 काम सुबह न करने से सदा रहेंगे सुखी

Updated on 2 January, 2018, 7:15
स्त्री हो या पुरुष, दोनों के लिए सुबह की शुरुआत अच्छी हो जाए तो पूरा दिन सुखद और शांत रहता है। इसी वजह सुबह-सुबह कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे दिन की शुरुआत ही बिगड़ जाए। यदि ऐसा होता है तो पूरे दिन ही हमारे स्वभाव पर और सभी... आगे पढ़े

गृहस्थ में रहकर भी बना जा सकता है संन्यासी

Updated on 30 December, 2017, 7:00
मोक्ष की व्यवस्था में एक गृहस्थ का क्या भविष्य है और क्या उसे मोक्ष की प्राप्ति के लिए संन्यासी हो जाना चाहिए? इस प्रश्न का उत्तर यह है कि यदि आप मन को साध लें तो फिर भले आप गृहस्थ हैं, वानप्रस्थी हैं या संन्यासी, आपको मोक्ष मिल जाएगा। यह... आगे पढ़े

यहां है वह स्थान, जहां खोजने पर मिलती है खुशी

Updated on 27 December, 2017, 21:30
- श्री श्री रविशंकर, आध्यात्मिक गुरु आज हममें से हरेक खुशी और शांति की तलाशकर रहा है. यह खोज सर्वव्यापी है. आखिरकार दुखी तो कोई भी नहीं रहना चाहता. लोग अलग-अलग तरीकों से खुशियां ढूंढऩे की कोशिश करते हैं. कुछ इसे धन-दौलत और दुनियावी चीजों में ढूंढ़ते हैं. कुछ इसे यश और... आगे पढ़े

दिन दुगुनी रात चौगुनी तरक्की के लिए दिशा तय करें और आगे बढ़ें

Updated on 19 December, 2017, 7:00
एक पहलवान जैसा, हट्टा-कट्टा, लम्बा-चौड़ा व्यक्ति सामान लेकर किसी स्टेशन पर उतरा। उसने एक टैक्सी वाले से कहा कि मुझे एयरपोर्ट जाना है। टैक्सी वाले ने कहा, ‘‘300 रुपए लगेंगे।’’ उस पहलवान आदमी ने अक्लमंदी दिखाते हुए कहा, ‘‘इतने पास के 300 रुपए, आप टैक्सी वाले तो लूट रहे हो। मैं... आगे पढ़े

लाईफ में कभी न छोड़े ये करना, Ego कभी न छोड़ेगी पीछा

Updated on 16 December, 2017, 6:45
धरती पर जन्म लेने के साथ ही सीखने की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है। ज्यों-ज्यों हम बड़े होते जाते हैं, सीखने की प्रक्रिया भी विस्तार लेती जाती है। जल्द ही हम उठना, बैठना, बोलना, चलना सीख लेते हैं। इस बड़े होने की प्रक्रिया के साथ ही कभी-कभी हमारा अहंकार हमसे... आगे पढ़े

सत्य के साथ बापू के प्रयोग, दे सकते हैं आपके जीवन को नई दिशा

Updated on 15 December, 2017, 7:20
राजकोट के अल्फ्रैड हाई स्कूल की घटना है। हाई स्कूल का मुआयना करने आए हुए थे, शिक्षा विभाग के तत्कालीन इंस्पैक्टर जाइल्स। नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को श्रुतिलेख के रूप में अंग्रेजी के 5 शब्द बोले जिनमें से एक शब्द था-केटल।  कक्षा का एक विद्यार्थी मोहनदास इस शब्द की वर्तनी ठीक... आगे पढ़े