लखनऊ
रमजान से जुड़े दीनी मसलों की जानकारी देने के लिए रमजान हेल्पलाइन चलाई जा रही है। इस पर रोज़ा, नमाज, तरावीह, जकात समेत किसी भी मसले का जवाब हासिल किया जा सकता है। हेल्पलाइन पर शुक्रवार को आए कुछ सवाल:

सुन्नी सवाल: क्या रोज़े की हालत में खून दे सकते हैं?
जवाब:
दिया जा सकता है, इसमें कोई हर्ज नहीं।
सवाल: अगर किसी शख्स पर सजदा सहव वाजिब हुआ और उसे करने से पहले दोबारा सजदा सहव वाजिब हो जाता है तो उस शख्स को कितने सजदा सहव करने होंगे?
जवाब:
सिर्फ एक सजदा सहव अदा करना काफी होगा।

सवाल: क्या जकात की रकम अपनी गरीब बेटी को दे सकते हैं‌?
जवाब:
बेटी को जकात नहीं दी जा सकती ।



सवाल: सहरी में अगर पान खाने के बाद कुल्ला करके सो जाएं, लेकिन सुबह थूक में पान की लाली रह जाए तो इससे रोज़े पर कोई असर होगा?
जवाब:
इससे रोज़े पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सवाल: क्या कोयला चबा कर दांत मांजने से रोज़ा टूट जाता है?
जवाब:
इससे रोज़ा मकरूह हो जाएगा, लेकिन कोयला अगर हलक में उतर गया तो रोज़ा टूट जाएगा।

पैनल: मौलाना खालिद रशीद और अन्य उलमा-ए-कराम
masael786@gmail.com
सुबह 10 से दोपहर 12 बजे के बीच।
9415023970, 9335929670, 9415102947

शिया
सवाल: क्या नमाज-ए-जमात घर में कर इफ्तार करवाया जा सकता है?
जवाब:
घर में नमाज-ए-जमात हो सकती है, लेकिन मस्जिद के सवाब से नमाजी महरूम रहेंगे।

सवाल: क्या औरत के पीछे नमाज पढ़ी जा सकती है?
जवाब:
औरत सिर्फ औरत की इमाम बन सकती है। मर्द, औरत के पीछे नमाज नहीं पढ़ सकता।

सवाल: क्या कर्बला से लाकर रखे गए कफन पर भी खुम्स वाजिब है?
जवाब:
चूंकि कफन नया है, इसलिए उसकी कीमत पर खुम्स निकालना वाजिब है।

सवाल: क्या कजा नमाज जमात से पढ़ी जा सकती है?
जवाब:
हर वाजिब नमाज को जमात से पढ़ा जा सकता है, चाहे नमाज कजा हो या अदा हो।

पैनल: मौलाना सैफ अब्बास नकवी व अन्य शिया उलमा
ramzanhelpline2005@gmail.com
दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे के बीच।
9839097407, 9415580936, 9335280700