सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लोढ़ा कमेटी की ज्यादातर सिफारिशों को मंजूरी दे दी। ये तमाम सिफारिशें भारत में क्रिकेट नियंत्रण में सुधार संबंधी थी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इन सिफारिशों को लागू करने के लिए बीसीसीआई को 6 महीने का वक्त भी दिया है।
आईपीएल में स्पॉट-फिक्सिंग और सट्टेबाजी के आरोपों के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2014 में लोढ़ा कमेटी का गठन किया था।

चीफ जस्टिन टीएस ठाकुर ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि इससे कुछ सुधार होगा। यह आने वाली पीढ़ी के लिए है।”

तीन सदस्यों वाली इस कमेटी के अध्यक्ष देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर एम लोढ़ा थे, जिन्होंने बीसीसीआई में प्रशासनिक बदलावों की पैरवी की थी। इन सिफारिशों में आईपीएल और बीसीसीआई को अलग करने की बात थी। इसके अलावा बोर्ड के सदस्यों की उम्र सीमा भी तय की गई। मंत्रियों और नौकरशाहों को बीसीसीआई से दूर रखने की भी सिफारिश की गई थी।

एक राज्य के पास एक मताधिकार हो, इसकी सिफारिश की गई। गुजरात, महाराष्ट्र में एक से ज्यादा क्रिकेट संघ होने के कारण उनके अधिकार बढ़ जाते हैं। इसके अलावा सीएजी की तरफ ने एक प्रतिनिधि को बोर्ड में शामिल किया जाना चाहिए। सट्टेबाजी को मान्यता देने का फैसला कोर्ट ने संसद पर छोड़ दिया है।

हालांकि बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने इस पर यह कहते हुए कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया कि उन्हें अभी इस फैसले को ठीक से पढ़ना है।