चौथी सबसे बड़ी चंदा बटोरने वाली पार्टी, लेकिन 'आप' के पास पैसे नहीं हैं। अपने विधायकों-सांसदों को पीएम से ज्यादा वेतन देने वाली पार्टी, लेकिन 'आप' के पास पैसे नहीं हैं। दिल्ली चुनाव के दौरान प्रचार में भी दिल खोलकर करोड़ों खर्च किए, लेकिन 'आप' के पास पैसे नहीं हैं। आखिर 'आप' के पैसे कहां गए?
यह सवाल वाजिब है, क्यों कि एक तरफ केजरीवाल रोना रो रहे हैं कि उनकी पार्टी के पास चुनाव लड़ने के लिए पैसे नहीं हैं, तो वहीं चुनाव आयोग कहा रहा है कि आम आदमी पार्टी देश चौथी सबसे बड़ी चंदा इकट्ठा करने वाली पार्टी है। 

आमतौर पर केजरीवाल बिना लाग-लपेट के बात करते हैं, लेकिन सच की कसौटी पर ही करते हैं, अब इस पर संदेह खड़ा हो गया है। केजरीवाल रविवार को गोवा की जनता से मुखातिब हुए। इस मौके पर उन्होंने जो रोना रोया कि उसे राजनीति के विश्लेषक सियासत के घड़ियाली आंसू की संज्ञा दे सकते हैं। केजरीवाल कह रहे हैं कि चुनाव लड़ने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं। पार्टी की तंगहाली बयां करते हुए केजरीवाल ने यहां तक कहा कि वह अपना बैंक खाता बतौर सुबूत पेश कर सकते हैं।

केजरीवाल गोवा में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दिल्ली चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि असली चुनाव दिल्ली की जनता ने लड़ा, इसी प्रकार गोवा की जनता चाहे को बेहतर भविष्य के लिए आम आदमी पार्टी के प्लेटफॉर्म से चुनाव लड़ सकती है। केजरीवाल की इन बातों का मतलब साफ था कि जनता उन्हें जी खोलकर चुनाव के लिए चंदा दे। लेकिन लगता है कि अब उनकी उम्मीदों पर चुनाव आयोग ने पानी फेर दिया है। रही बची कसर विरोधी पार्टियां पूरी कर दे रही हैं।

2014-15 वित्त वर्ष में 'आप' को मिला 37.45 करोड़ रुपए का चंदा

चुनाव आयोग की मानें तो केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की हालत वैसी नहीं है जैसी केजरीवाल बता रहे हैं। पार्टी बीजेपी, कांग्रेस और एनसीपी के बाद सबसे ज्यादा चंदा इकट्ठा करती है। चुनाव आयोग के मुताबिक 2014-15 वित्त वर्ष में 'आप' ने 37.45 करोड़ रुपए चंदा इकट्ठा किया। 'आप' से ज्यादा चंदा पाने वाली पार्टियों में सबसे ज्यादा बीजेपी को 437.35 करोड़ रुपए चंदा मिला। दूसरे नंबर पर कांग्रेस को 141.55 करोड़ रुपए चंदा मिला। वहीं, एनसीपी को 38.82 करोड़ रुपए चंदे में मिले।

अन्य क्षेत्रीय पार्टियों के मुकाबले चंदा इकट्ठा करने में आम आदमी पार्टी बेहतर स्थिति में हैं। उन पार्टियों के मुकाबले भी जो फिलहाल सरकार चला रही हैं। उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी को ही लें, पार्टी की देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य में सरकार है, लेकिन चंदे की बात करें तो पार्टी को 2014-15 वित्त वर्ष में 'आप' से बहुत कम 19.50 करोड़ रुपए बतौर चंदा मिले।

उड़ीसा की बीजेडी को 21.80 करोड़, पंजाब में शिरोमणी अकाली दल को 3.01 करोड़, तेलंगाना में टीआरएस को 8.69 करोड़, आंध्रप्रदेश में तेलगु देशम पार्टी को 7.57 करोड़, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को 8.32 करोड़ और महाराष्ट्र में बीजेपी के साथ गठबंधन वाली शिवसेना को 25.58 करोड़ रुपए बतौर चंदा मिले।

जॉली का केजरीवाल पर वार, कहा- झूठ का पुलिंदा

केजरीवाल की पैसे न होने की बात विरोधी दलों के गले के नीचे नहीं उतर रही है। कांग्रेस ने केजरीवाल की बात को आज तक का सबसे बड़ा पाखंड करार दिया। कांग्रेस ने केजरीवाल से इंडिया अगेन्स्ट करप्शन के तहत इकट्ठे किए गए चंदे का हिसाब मांगा, जो पार्टी ने अब तक नहीं दिया है। इसी संस्था के बैनर के तले अन्ना आंदोलन को अंजाम दिया गया था।

वहीं, बीजेपी ने केजरीवाल को झूठ का पुलिंदा कहा। बीजेपी नेता विजय जॉली ने कहा कि केजरीवाल ने गोवा में जो कहा है, वह मोटा चंदा बटोरने की चाल है। इस चंदे को वह अपनी सनक और अपने सपने को पूरा करने के लिए खर्च करेंगे। जॉली ने कहा कि केजरीवाल को चंदा इकट्ठा करने में बड़ी दिलचस्पी है। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि दिल्ली में केजरीवाल ने करोड़ों रुपए चंदा इकट्ठा किया था, लेकिन उन्होंने राजधानी के लिए क्या किया?

जॉली की मानें तो केजरीवाल का विश्वास नहीं किया जा सकता और लोगों के बीच उनकी छवि खराब हो रही है। वह हर चुनाव के पहले भारी मात्रा में चंदा बटोरते हैं फिर कहते हैं कि पैसे हैं नहीं। जॉली ने भी केजरीवाल पर अन्ना आंदोलन के दौरान इंडिया अगेन्स्ट करप्शन के बैनर के तले इकट्ठे किए गए चंदे को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केजरीवाल का धोखा उजागर हो गया है और लोग अब उनकी बात पर ध्यान नहीं देते हैं।