नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कर्नाटक के बीदर से अपने दक्षिण भारत के चुनावी अभियान 2019 का आगाज करेंगे। इससे पहले राजस्थान के जयपुर से विधानसभा चुनाव अभियान को शुरु किया था। आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आगामी लोकसभा चुनाव अभियान का बिगुल फूकेंगे। राहुल गांधी अपनी दो दिवसीय दक्षिण भारत यात्रा के दौरान कर्नाटक के बीदर में एक 'किसान रैली' को संबोधित करने के साथ तेलंगाना में भी कांग्रेस के चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे। कर्नाटक का बीदर प्रदेश में लंबे समय तक चले किसान आंदोलन का मुख्य केंद्र रहा है। हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी ने वादा किया था कि यदि कांग्रेस की सरकार फिर से बनती है तो किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। कर्नाटक में जेडी(एस)-कांग्रेस गठबंधन की सरकार है, और राहुल गांधी के किए वादे के मुताबिक ही सीएम एचडी कुमारस्वामी ने अपने पहले बजट में किसानों के कर्ज माफी की घोषणा कर दी थी। केंद्र की मोदी सरकार की तरफ से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) वृद्धि पर राहुल गांधी अक्सर तंज करते पाए गए हैं कि जितना केंद्र सरकार फसलों का एमएसपी बढ़ा कर पूरे देश में खर्च कर रही है उससे कहीं ज्यादा कांग्रेस-जेडी(एस) गठबंधन सरकार ने किसानों की कर्ज माफी में खर्च करने का वादा किया है।

कर्नाटक में किसानों को लुभाने के अलावा कांग्रेस लोकसभा चुनाव से पहले राज्य के मजबूत लिंगायत-वीरशैव समाज का भी विश्वास जीतने की कोशिश कर रही है। दरअसल बीदर लिंगायत बहुल क्षेत्र होने के साथ कर्नाटक कांग्रेस के नवनिर्वाचित कार्यवाहक अध्यक्ष ईश्वर खंड्रे का गृह क्षेत्र भी है। ईश्वर खंड्रे कर्नाटक कांग्रेस के उन नेताओं में से एक हैं जिन्होंने सिद्धारमैया सरकार द्वारा लिंगायत समुदाय को अलग धर्म घोषित करने के फैसले का पुरजोर विरोध किया था।

हाल के दिनों में कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल कांग्रेस अध्यक्ष से मिलकर लिंगायत-वीरशैव समुदाय की नाराजगी से कांग्रेस को हुए नुकसान के बारे में अवगत कराया था। बता दे कि 2018 विधानसभा चुनाव में लिंगायत-वीरशैव समाज से आने वाले कांग्रेस विधायकों की संख्या 33 से घटकर 16 हो गई थी। जबकि भाजपा से लिंगायत-वीरशैव समुदाय से इस बार 38 विधायक चुनकर आए थे। लिहाजा कांग्रेस लोकसभा चुनावों से पहले लिंगायत-वीरशैव समाज को अपने खेमे में करने की जुगत लगा रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बीदर में किसान रैली को संबोधित करने के बाद तेलंगाना भी पहुंचेंगे। अध्यक्ष बनने के बाद तेलंगाना में यह राहुल गांधी का पहला दौरा होगा। अपने दो दिवसीय तेलंगाना प्रवास के दौरान राहुल पार्टी कार्यकर्ताओं में आगामी लोकसभा और तेलंगाना विधानसभा चुनावों के लिए जी जान से जुट जाने का संदेश देंगे। तेलंगाना में राहुल कुछ स्वयं सहायता समूहों, उद्योगपतियों और छात्रों से मिलने के साथ सेरी-लिंगमपल्ली में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

 

उल्लेखनीय है कि आंध्र प्रदेश के विभाजन का सबसे बड़ा खामियाजा कांग्रेस पार्टी को भुगतना पड़ा था। साल 2014 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को अपने सबसे मजबूत गढ़ तटवर्ती आंध्र-रायलसीमा में हार का सामना करना पड़ा था। सेरी-लिंगमपल्ली की जनसभा से कांग्रेस अपने परंपरागत किले को फिर से हासिल करने की कवायद करेगी। वहीं तेलंगाना की चंद्रशेखर राव सरकार की तरफ से आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2014, जिसमें आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देना शामिल था को लागू करवाने में केंद्र पर पर्याप्त दबाव नहीं बना पाने को भी उजागर करेगी। बता दें आंध्र को विशेष राज्य का दर्ज देने के मुद्दे पर टीडीपी द्वारा केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर टीआरएस वॉकआउट कर गई थी। कांग्रेस, टीआरएस के इसी वादाखिलाफी का फायदा उठना चाहती है। बता दें कि आगामी लोकसभा चुनाव के साथ ही आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी चुनाव होने हैं।