नई दिल्ली,UPSC Civil Services IAS Interview: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के अंतिम पड़ाव इंटरव्यू के दौरान बहुत बार ऐसे सवाल पूछ लिए जाते हैं जिन की आपको बिल्कुल उम्मीद नहीं होती। इन सवालों से यह जानने की कोशिश की जाती है कि जब आप आईएएस जैसे प्रतिष्ठित पद बैठेंगे तो किस मसले को आप किस तरीक से हल करेंगे। यूपीएससी 2017 परीक्षा में ऑल ओवर इंडिया में 25वी रैंक पाने वाले साद मियां खान से उनके इंटरव्यू में 'जवाबदेही' पर प्रश्न पूछा गया। उनसे पूछा गया कि जवाबदेही क्या होती है


पढ़ें इंटरव्यू के कुछ अंश साद ही की जु़बानी....

'' मुझसे पूछा गया कि जवाबदेही क्या होती है? और इसे कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है। तो मैंने जवाब में कहा कि जवाबदेही यानी उत्तर देने का दायित्व, जिससे आप अपनी शक्ति का दुरुपयोग न कर पाएं। मैंने इंटरनल अकाउंटेबिलिटी की बात की जो कि डिपार्टमेंटल अकाउंटेबिलिटी होती है। एक डिपार्टमेंट जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए क्या एक्शन ले सकता है। एक दूसरी अकाउंटेबिलिटी एक्सटर्नल होती है। न्यायपालिका, एनजीओ, मीडिया, सिविल सोसायटी एक्सटर्नल अकाउंटेबिलिटी के पार्ट होते हैं। 

जवाबदेही की जरूरत इसलिए है क्योंकि कोई अपनी ताकत का गलत इस्तमेाल न करें। जो संसाधन उसके पास हैं उनका नियमों के तहत ही उपयोग करें, न कि दुरुपयोग करे। 

मेरी हॉबी में फिटनेस लिखा हुआ था। वर्कआउट है। उन्होंने पूछा कि फिटनेस का भारत में क्या रोल है। मैंने उत्तर दिया का आज भारत में मोटापा, मधुमेह मानसिक बीमारियां, दबाव, तनाव के बढ़ते मामलों के चलते आज फिटनेस का काफी अहम भूमिका है। हर किसी को यह अपनाना चाहिए। रोजाना आधे से एक घंटा दें।

फिर भारत, नेपाल, चीन संबंधों पर बात हुई। अवैध खनन पर सवाल पूछा गया। 

फिर मुझसे पूछा गया कि अवैध खनन से पर्यावरण को कैस नुकसान हो रहा है। मैंने उत्तर दिया कि हर नदी का अपना एक रास्ता होता है। हमें उसे बहने देना चाहिए। लेकिन अवैध खनन के चलते नदी का जो प्राकृतिक मार्ग होता है उससे बहने नहीं दिया जा रहा। उसकी वजह से बाढ़, जल प्रदूषण, नदियों में रहने वाले जीव-जंतु और किनारे पर रहने वाले समुदायों पर बुरा असर पड़ा रहा है। इससे सरकार को कोई राजस्व नहीं प्राप्त होता, इसलिए उससे उसे भी पैसा नहीं जा रहा। मैंने पॉजिटिव नोट में कहा माइनिंग पूरी बैन करने की जरूरत नहीं है, इससे रेगुलराइज करने की जरूरत है। ताकि सरकार को भी टैक्स मिले। रोजगार भी मिले। कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री पर बुरा असर भी न पड़े।''