नई दिल्ली:  जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में पिछले दिनों सुरक्षाबलों ने हिजबुल के दो आतंकियों को मार गिराया. इनमें से एक आतंकी मनान वानी पूर्व में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का छात्र रह चुका है. मनान वानी के एनकाउंटर पर क्रिकेटर गौतम गंभीर ने राजनीतिक दलों पर निशाना साधा था. गौतम गंभीर ने मनान वानी की मौत को लेकर टि्वटर पर सवाल खड़ा किया. जिसके जवाब उमर अब्दुल्ला ने दिए. 

मनान वानी कुपवाड़ा जिले के ताकीपुरा गांव का रहने वाला था. जनवरी महीने में जब उसने हिजबुल को ज्वाइन किया था, उस वक्त उसने AK-47 के साथ सोशल मीडिया पर अपनी फोटो डाला था. बता दें, मनान के पिता प्रिंसिपल हैं, जबकि एक भाई इंजीनियर है.

मनान वानी क्रिकेटर गौतम गंभीर और नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्लाह भिड़ गए. दोनों के बीच टि्वटर पर ही झगड़ा हो गया. गौतम गंभीर ने मनान वानी जैसे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के स्कॉलर के आतंकवादी बनने के पीछे राजनेताओं को जिम्मेदार बताया.

गौतम गंभीर ने कांग्रेस, भाजपा, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को टैग करते ट्वीट में लिखा- 'आपको शर्म से सिर नीचे कर लेना चाहिए, क्योंकि आपके कारण एक युवा किताब से गोलियां चलाने पर मजबूर हुआ है.' 
गंभीर के इस ट्वीट के जवाब में उमर अब्दुल्ला ने जवाब देते हुए लिखा- 'इस व्यक्ति (गंभीर) को नक्शे पर मनान के घर का जिला भी नहीं पता होगा, मगर ये बात कर रहे हैं कि कैसे एक युवा कश्मीर में बंदूक उठा लेता है. गंभीर को कश्मीर के बारे में उतना ही पता है, जितना मुझे क्रिकेट के बारे में. मुझे क्रिकेट के बारे में कुछ नहीं मालूम.'
इसके बाद दोनों के बीच बात बढ़ गई. गंभीर ने ट्वीट में लिखा- 'आप नक्शे के बारे में बात मत ही करो, आपने तो कश्मीर को पाकिस्तान के नक्शे में जोड़ने में बहुत मेहनत की है. आप बताओ कि आपने और आपके साथी नेताओं ने कश्मीरी युवा के लिए किया ही क्या है?' इसके जवाब में उमर ने लिखा- 'हाल ही में मेरी पार्टी के दो साथियों कि आतंकियों ने हत्या कर दी थी. साल 1988 से अब तक पार्टी के हजार से अधिक कार्यकर्ता मारे जा चुके हैं. मैं राष्ट्रवाद और बलिदान पर आपसे बहस नहीं करना चाहता, जिसको इसका अर्थ ही न पता हो.’
गौतम गंभीर ने इसका भी जवाब दिया. उन्होंने लिखा- उमर अब्दुल्ला जी आप अकेले नहीं है, आप जैसे कई राजनेता हैं, जिन्हें आईना देखने की आदत नहीं है. यही वजह है कि देश में खून बह रहा है. राष्ट्रवाद और बलिदान को वास्तविक चरित्र की जरुरत है, न कि आप जैसे दिखावटी लोगों की, जिनका दिखावटी प्रेम सोशल मीडिया के 280 शब्दों की लिमिट में सीमित है.
बता दें कि मनान वानी ने जनवरी के महीने में पीचएडी की पढ़ाई बीच में छोड़कर आतंकी संगठन हिजबुल को ज्वाइन किया था. 6 जनवरी 2018 को उसे दिल्ली से कश्मीर जाना था. इसी दौरान उसकी एके-47 के साथ तस्वीर सोशल मीडिया पर आ गई थी. यह खबर मिलते ही एएमयू प्रशासन ने उसे यूनिवर्सिटी से निष्काषित कर दिया था.