रायपुर। छत्तीसगढ़ के बांधों का कंठ अभी से सूखने लगा है। राज्य में 11 बड़े समेत कुल 43 बांध हैं। इनमें अभी औसत 60 फीसद ही पानी बचा है। बड़े बांधों में से पांच में 50 फीसद से भी कम पानी है। यह स्थिति तब है जबकि इस बार मानसून के दौरान औसत बारिश हुई है। मानसून सीजन खत्म हुए अभी बमुश्किल तीन महीने भी नहीं गुजरे हैं। बांधों की इस स्थिति ने चिंता बढ़ा दी है। हालांकि जल संसाधन विभाग के अफसरों का दावा है कि राज्य में कहीं जल संकट की स्थिति नहीं है।

तीन-चार वर्ष से नहीं हो रही अच्छी बारिश

 

राज्य में पिछले तीन-चार वर्ष से अच्छी बारिश नहीं हो रही है। 2017 में 21 से अधिक जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था। इससे पहले 2016 में भी आधा दर्जन जिलों में बारिश नहीं हुई थी। इसी वजह से बांधों में भी ठीक से जल भराव नहीं हो रहा है।

रबी सीजन में नहीं देते पानी

 

बांधों में जल भराव नहीं होने के कारण ही सरकार रबी सीजन में खेतों के लिए पानी नहीं दे पा रही है। इसकी वजह से विरोध प्रदर्शन और सियासत भी हुई, इसके बावजूद किसानों को पानी नहीं दिया गया। सरकारी सूत्रों के अनुसार ऐसा रबी सीजन में धान की खेती को हतोत्साहित करने के लिए किया जाता है। वहीं बांधों में पानी नहीं होना भी एक कारण है।

बड़े पैमाने पर एनीकट बने फिर भी गिर रहा जल स्तर

 

राज्य बनने के बाद से यहां की नदियों में बड़े पैमाने पर बांध और एनीकट बनाए गए हैं, इसके बावजूद भू-जल स्तर गिर रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बीते तीन वर्षों से डेढ़ मीटर की औसत से भूजल स्तर गिर रहा है।

पिछले वर्ष इससे भी कम था जल स्तर

 

पिछले वर्ष पड़े सूख के कारण बांधों में जल भराव कम था। दिसंबर 2017 में सभी 43 बांधों में जलभराव का औसत 56.89 फीसद था। वहीं, 2016 में 77.59 फीसद पानी था।

भूजल को लेकर कई तरह की चिंताएं

 

रायपुर स्थित पं. रविशंकर विश्वविद्यालय के भूजल विशेषज्ञ डॉ. दुर्गा पद कुईति के अनुसार भूजल और पर्यावरण को लेकर कई तरह की चिंता करने और ठोस प्रयास की जरूरत है। बारिश असामान्य हो रही है। पहले 10-12 साल में एक बार सूखा पड़ता था, लेकिन अब इसका औसत बढ़ गया है।