भोपाल। दो महीने की कमल नाथ सरकार ने प्रदेश में उद्योगिक विकास और रोजगार की दिशा में पहल शुरू कर दी। इसी तारतम्य में मंगलवार को राजधानी के मिंटो हॉल में उद्योगपतियों की गोल मेज कांफ्रेंस आयोजित की गई। इसमें नाथ ने उद्योगपतियों के साथ राउंड टेबल बैठक की। इस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कमल नाथ ने कहा-सरकार, ऐसे उद्योगों को प्रोत्साहित करेगी जो अधिक से अधिक रोजग़ार उपलब्ध कराएंगे। हमारी नीति होगी कि जो निवेश जितने अधिक रोजग़ार देगा, उसे उतनी ही अधिक सुविधाएं मिलेंगी। नाथ ने आगे कहा कि हम मध्यप्रदेश में निवेश के लिए एक नया वातावरण और नई कार्य-संस्कृति बनायेंगे, जो निवेशकों के विश्वास को न केवल लौटाएंगी बल्कि उसे मजबूत भी बनाएगी। उन्होंने कहा कि हम उद्योगों के लिए समग्र नीति बनाने के साथ ही सेक्टर वाइज़ नीति भी बनाएंगे। 

कृषि, रोजग़ार पर खास ध्यान
मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि ऐसे निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा, जो हमारे कृषि क्षेत्र को समृद्ध बनाए। उन्होंने कहा, हमारे सामने कृषि विकास के साथ-साथ रोजग़ार उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चुनौती और सर्वोच्च प्राथमिकता है। निवेश से ही रोजग़ार दे पाना सम्भव है। नाथ ने आगे कहा, निवेश को दबाव से नहीं लाया जा सकता। उसके लिए हमें ऐसी नीतियां और वातावरण बनाना होगा, जिससे निवेश स्वत: हमारे प्रदेश की ओर आकर्षित हो। हम इसी विचार के साथ मध्यप्रदेश में आगे बढऩा चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हम मध्यप्रदेश में सरकार और निवेशकों के बीच में बेबाक साझेदारी चाहते हैं।

जानी उद्योगपतियों की समस्याएं
नाथ ने कहा कि हमने ये बैठक निवेश के लिए नहीं की है, बल्कि हम इस बैठक के जरिए उन उद्योगों की समस्याओं और जरूरतों को जानना चाहते हैं जो पूर्व से ही हमारे प्रदेश में उद्योग चला रहे हैं। सबसे पहले हमारा लक्ष्य स्थापित उद्योगों के सामने उपस्थित समस्याओं और आवश्यकताओं को पूरा करना है ताकि उससे यह संदेश जाए कि मध्यप्रदेश में सरकार निवेशकों के सहयोग के लिए तत्पर है। 

रोजगार के लिए सोच में बदलाव
नाथ ने कहा कि हमारी नीति होगी कि हम मध्यप्रदेश में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करें। इससे जहां एक ओर प्रदेश का विकास होगा, वहीं दूसरी ओर लोगों की क्रय शक्ति भी बढ़ेगी और युवाओं को रोजग़ार मिलेगा। प्रदेश में निवेश के लिए तंत्र की कार्य-शैली और सोच में परिवर्तन लाएंगे। एक नये दृष्टिकोण के साथ इस दिशा में राज्य शासन काम कर रहा है। नाथ ने कहा, उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए समग्र नीति के साथ-साथ हर क्षेत्र के लिए अलग-अलग नीति बनायेंगे। इससे हम उनकी जो जरूरतें हैं, उसे पूरा कर पाएंगे। निवेशक ज्यादा आसानी से निवेश कर सकेंगे। किसी भी प्रकार का कोई भ्रम नहीं रहेगा।

रोजग़ार देने वाले उद्योगों को बढ़ावा
नाथ ने कहा कि प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग, टूरिज्म, टेक्सटाईल और आई.टी. के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देंगे। इन क्षेत्रों में अधिक से अधिक निवेश हो, इसका प्रयास करेंगे। नाथ ने कहा कि ये वो क्षेत्र है, जिनसे हम प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं को रोजग़ार दे सकेंगे।

कौशल विकास की मांग-पूर्ति का अंतर समाप्त होगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशकों को उनके उद्योग के हिसाब से कौशल मिल सके, इस दिशा में भी प्रयास कर रहे हैं। इस क्षेत्र में मांग और पूर्ति का जो अंतर है, उसे कम करना चाहते हैं। उन सारी दिक्कतों और अड़चनों को दूर करेंगे जिससे प्रदेश में निवेश करना आसान हो सके। निरंतर संवाद और सुझाव के लिए हमारी सरकार के दरवाजे सदैव खुले रहेंगे।

नागरिकों की जीवन-यापन शैली को समृद्ध करेंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश को बढ़ावा देकर हम प्रदेश के नागरिकों की जीवन-यापन की शैली को समृद्ध बनाएंगे। हमारा लक्ष्य है कि प्रदेश के जो लोग एक बार खाना खाते है, उन्हें दो बार का भोजन मिले। जो दो बार भोजन कर रहें हैं, उन्हें और अच्छा भोजन मिले। वे एक सम्मानित जीवन, खुशहाली के साथ जी सकें।

निवेश बढ़ाएं सुविधा-संसाधन सरकार देगी
मुख्यमंत्री ने कांफ्रेंस में आए सभी उद्योगपतियों से आग्रह किया कि प्रदेश में बेहतर औद्योगिक वातावरण के लिए क्या हो सकता है, क्या करना चाहिए, क्या नहीं होना चाहिए। इस पर अपने सुझाव दें। निवेश बढ़ाएं। इसमें जो भी सुविधाएं और संसाधान चाहिए, वह सरकार उपलब्ध करवाएगी।

उद्योगों से संवाद, बना नया वातावरण : मुख्य सचिव
गोल मेज कांफ्रेंस के बारे में मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती ने कहा कि मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कार्यभार संभालने के बाद उद्योगों से संवाद कायम कर एक नया वातावरण बनाया है। प्रदेश की निवेश नीति सुदृढ़ हो और जीवंत संवाद हो, इसके लिये राज्य शासन इस दिशा में निरंतर काम कर रहा है

रोजगार देने की प्रक्रिया समझाई
मुख्यमंत्री नाथ ने बैठक में रोजगार बढ़ावा देने की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने कहा अगर 500 करोड़ रुपए के किसी निवेश से प्रदेश में मात्र 150 लोगों को रोजगार मिल रहा है और 100 करोड़ रुपए का कोई अन्य निवेश प्रदेश के एक हजार लोगों को रोजगार दे रहा है तो सरकार 100 करोड़ रुपए वाले निवेश को प्राथमिकता देगी।

ये कंपनियां शामिल हुईं
बैठक में पिनेकल इंडस्ट्रीज के चेयरमेन सुधीर मेहता, बिरला  कारपोरेशन के हर्ष वी. लोढा, इवोन इंडस्ट्रीज लिमिटेड व सीआईआई एमपी के चेयरमेन राजेश खरे, एचईजी के चेयरमेन रवि झुनझुनवाला, सागर मैन्युफैक्चरर के चेयरमेन दिनेश पाटीदार, ट्राइडेंट लिमिटेड के चेयरमैन राजिन्दर गुप्ता, वाचमेट के दिनेश च्रंदा,वेलस्पन के बीके गोयनका, थिंक गैस डिस्ट्रीब्यूशन के अमितावा सेन समेत अन्य उद्योगों के एक्जीक्युटिव डायरेक्टर, एमडी और अन्य प्रतिनिधि बैठक में मौजूद रहे। इसके अलावा सोनिक बायोकेम एक्सटैक्शन लिमिटेड , सन फार्मास्युटिकल्स, सूर्या रोशनी लिमिटेड, सुजलान एनर्जी, सिम्बायसिस, वाकमेट, वर्धमान, वीई कामर्शियल व्हीकल्स, जय भारत मारूति आटो लिमिटेड के सीईओ, एमडी भी शामिल हुए। इनके अलावा एड्रायट इंडस्ट्रीज, एक्जो नोबल इंडिया, आशा गु्रप ऑफ कम्पनीज ने भी अपने सुझाव रखें।

उद्योगों की समस्याएं दूर करने हैण्ड होल्डर्स
-सरकार हैण्ड होल्डर्स नियुक्त करेंगी, जो निवेशकों के साथ मित्रवत व्यवहार रखेंगे। हाथों-हाथ उनका काम करायेंगे और सीधे मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करेंगे। दस-बारह यूनिट के साथ समन्वय के लिये एक अधिकारी उद्योग विभाग का नियुक्त होगा। यह अधिकारी मुख्यमंत्री के सीधे सम्पर्क में रहेगा। 
-मध्यप्रदेश में स्थापित उद्योगों की समस्याओं और जरूरतों का प्राथमिकता के साथ समाधान किया जायेगा।
-निवेशकों के विश्वास को वापस लाने की दिशा में काम होगा।
- निवेश स्वत: आकर्षित होकर आए, ऐसी नीति बनायी जाएगी।
- निवेश लाने के लिये कार्य-शैली और सोच में परिवर्तन लाया जाएगा।
-कृषि विकास और रोजगार आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
-जो निवेश जितना अधिक रोजगार पैदा करेगा, उसे उतनी ही अधिक सुविधाएं मुहैया कराई जायेंगी।
- खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन, धार्मिक पर्यटन, आईटी और टेक्सटाईल्स निवेश को बढ़ावा देंगे।