फिल्म केसरी बड़े पर्दे पर रिलीज होने के साथ ही बॉक्स ऑफिस में धूम मचा रही है। दर्शकों के दिलों में जगह बनाने में खिलाड़ी कुमार यानी अक्षय एक बार फिर कामयाब हुए हैं। पहले दिन करीब 21 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई के साथ ओपनिंग करने वाली केसरी अब भी बॉक्स ऑफिस पर अपना सिक्का जमाए हुए है। ऐसे में समीक्षकों ने फिल्म की कहानी को लेकर कुछ सवाल खड़े किए हैं। दरअसल इस फिल्म को सच्ची कहानी पर आधारित होना बताया गया था, इस पर जानकारों ने अपनी राय रखते हुए कहा है कि इसमें कुछ ऐसे तथ्य हैं जो सच्ची कहानी से मेल नहीं खाते हैं। इतिहास के जानकार बताते हैं कि 21 सिख जवानों की 10 हजार हमलावरों से जंग वाली कहानी को केसरी में काल्पनिक बनाने जैसा काम किया गया है। आपको बतला दें कि ब्रिटिश इंडियन आर्मी की 36 सिख रेजीमेंट के 10 जवानों की 6 से 7 घंटे तक चली इस लड़ाई की फिल्मी कहानी में अनेक सवाल हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान सारागढ़ी पर शोध करने वाले कैप्टन जय सिंह सोहल ने बताया कि उस स्थान पर हवलदार इसहार सिंह को अकेले भेजा ही नहीं गया था जबकि इस फिल्म में उन्हें अकेले बताया गया है। गौरतलब है कि हवलदार इसहार सिंह का किरदार अक्षय कुमार ने निभाया है, जिसमें वो बहुत ही जानदार दिखे हैं। कहानी के संबंध में उनका कहना था कि 36 सिख रेजीमेंट को 1895 में उत्तर पश्चिमी फ्रंट पर भेजे जाने का आदेश दिया गया था। इसके साथ ही दिसंबर 1896 तक पेशावर में रुकने का आदेश उन्हें दिया गया था। हवलदार इसहार सिंह अपनी पूरी टीम के साथ वहां पहुंचे थे न कि फिल्म की तरह यूं ही घूमते हुए वहां अकेले ही पहुंचे थे। जानकारी तो यह भी कहते हैं कि अक्षय कुमार ने फिल्म में केसरी रंग की पगड़ी पहनी है, जबकि हवलदार इसहार की पगड़ी का  रंग केसरी था ही नहीं। दरअसल तब पगड़ी का रंग भी वर्दी के रंग की ही तरह खाकी ही हुआ करता था। केसरी रंग की पगड़ी इसलिए भी नहीं हो सकती क्योंकि यह खालसा का रंग है। इसी तरह सारागढ़ी पोस्ट में जंग से पहले मस्जिद बनाना और पठानों से बातचीत करने का मामला भी फर्जी है। दरअसल जवानों के पास इतना समय ही नहीं होता था कि वो यह सब कर पाते। कुल मिलाकर फिल्म की कहानी असली कहानी से मेल खाती हुई नजर नहीं आती है। इस कारण इसे कपोल कल्पना आधारित बताया जा रहा है और अनेक सवाल भी उठाए जा रहे हैं। बावजूद इसके फिल्म लोगों को पसंद आई है और वो लगातार बड़े पर्दे का रुख कर रहे हैं।