इंदौर । लोकसभा चुनाव के समय जानबूझकर 2004 की स्थिति निर्मित करने के प्रयास मध्य प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों के इंजीनियर और ठेकेदार मिलकर साजिश रच रहे हैं। ऐसा आरोप कांग्रेसी के लोग लगा रहे हैं। इस पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी समीक्षा कर कहा था, कि जब सरप्लस बिजली है। तब बिजली की कटौती और आंख मिचोली क्यों हो रही है। मुख्यमंत्री कमलनाथ के सख्त रुख को देखते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव आईसीपी केसरी ने मालवा के विभिन्न जिलों का दौरा किया।उनके दौरे में स्पष्ट रूप से कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई।
शुक्रवार को विद्युत वितरण कंपनी ने 83 इंजीनियरों को निलंबित किया।वहीं 91 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। उल्लेखनीय है, बार बार बिजली की अघोषित कटौती होने के बाद भी इंजीनियरों द्वारा लगातार लापरवाही की गई।इंदौर शहर के अधीक्षण यंत्री सुब्रतो राय की रिपोर्ट पर इंदौर शहर के छह इंजीनियर निलंबित किए गए।इसके अलावा अन्य जिलों के भी इंजीनियर लापरवाही के कारण निलंबित किए गए हैं। इंदौर राजस्व संभाग में सबसे ज्यादा 30 कर्मचारी और इंजीनियर निलंबित और बर्खास्त हुए हैं।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार विद्युत वितरण कंपनियों में पूर्व भाजपा सरकार से उपकृत कई स्थानों पर पावरफुल ठेकेदार काम कर रहे हैं। जो राजनीति में भी सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार लोकसभा चुनाव के पूर्व भाजपा वर्तमान सरकार की यह छवि बनाना चाहती है, कि कांग्रेस की सरकार आई, और बिजली गुल हुई। इस मामले में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने काफी सख्त रुख अपनाया है। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता खत्म होने के बाद इस मामले में गहराई से छानबीन की जाएगी।