अब तक स्टेथेस्कोप का इस्तेमाल दिल की धड़कनें सुनने के लिए किया जाता था लेकिन आईआईटी बॉम्बे के अनुसंधानकर्ताओं ने एक ऐसा स्टेथेस्कोप बनाया है जिसके जरिए धड़कनों को रेकॉर्ड भी किया जा सकता है।
इसमें सुविधानुसार आ‌वाज को तेज भी किया जा सकता है। 
इस डिवाइस (उपकरण) को तैयार करने वालों के अनुसार ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। ऐसे में दिल संबंधी बीमारियों का पता करने में कई बार उन्हें दिक्कत होती है। इस उपकरण के जरिए आसानी से दिल की धड़कनों को सुनने के साथ उन्हें रेकॉर्ड कर विशेषज्ञ डॉक्टर के पास भेजा जा सकता है। इस उपकरण का नाम शोधकर्ताओं ने ‘आयुसिंक’ दिया है। इसे आयु डिवाइस नामक कंपनी ने तैयार किया है। 
प्रदर्शनी में कई उपकरणों को किया गया शामिल
आईआईटी बॉम्बे के बायोमेडिकल इंजिनियरिंग ऐंड टेक्नॉलजी सेंटर इनक्यूबेशन (बीटिक) की सालाना प्रदर्शनी में कई प्रभावी और किफायती उपकरण लोगों के सामने रखे गए। इनमें दिल की धड़कनों को सुनने के लिए बने डिवाइस और पोर्टेबल ऑपरेशन थिअटर लोगों के आकर्षण के केंद्र रहे। आपातकाल और रिमोट एरिया में ऑपरेशन के लिए कॉलेज के शोधकर्ताओं की ओर से तैयार किया गया पोर्टेबेल ऑपरेशन थिअटर प्रभावी रहा। एक बैग में मोड़कर पूरा ऑपरेशन थिअटर रखा जा सकता है। दरअसल, प्लास्टिक और कपड़े की मदद से इस विशेष ऑपरेशन थिअटर को तैयार किया गया है। इसमें इस्तेमाल सभी चीजों को स्टर्लाइज किया गया है, ताकि किसी भी तरह का संक्रमण न फैले।