भोपाल । प्रदेश का बहुचर्चित व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित एसआई, सूबेदार और 'प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा 2012 घोटाले में सीबीआई ने जांच पूरी कर ली है। जांच उपरांत 34 लोगों के खिलाफ अंतिम पूरक चालान पेश किए गए है। मामले में पहले एसटीएफ ने चार बार पूरक चालान पेश किए हैं। इसमें कुल 36 आरोपित बनाए गए थे। सीबीआई ने एसटीएफ की जांच को आगे बढ़ाते हुए अंतिम चालान में मात्र एक आरोपित हर्षवर्धन सिंह का नाम जोड़ा है। मामले में तीन आरोपितों की मौत हो गई है। सीबीआई द्वारा सोमवार को व्यापमं मामलों के विशेष न्यायाधीश अजय श्रीवास्तव की अदालत में 111 पन्नों का चालान पेश किया गया। चालान के साथ 256 दस्तावेज पेश किए गए हैं, जबकि गवाहों की संख्या 85 है। चालान में 16 परीक्षार्थी, 16 बिचौलिए और एक अभिभावक को आरोपित बनाया गया है। 
    मामले में व्यापमं के पूर्व नियंत्रक पंकज त्रिवेदी, कंप्यूटर एनालिस्ट नितिन मोहिंद्रा, अजय कुमार सेन, सीके मिश्रा, बिचौलिए के रूप में पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के ओएसडी रहे ओपी शुक्ला, सुधीर शर्मा, कांग्रेस नेता संजीव सक्सेना, डीआईजी आरके शिवहरे सहित अन्य के खिलाफ षडयंत्र, धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जीवाड़ा, आईटी एक्ट और मध्यप्रदेश परीक्षा अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। इस मामले में एसटीएफ ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच की और पूर्व में चार बार चालान पेश किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 9 जुलाई 15 को याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश किए थे। सीबीआई ने उक्त आदेश के बाद 25 जुलाई 2015 को मामले की जांच शुरू की और अंतिम चालान पेश किए जाते समय मात्र एक आरोपित हर्षवर्धन सिंह चौहान का नाम जोड़ा है। हर्षवर्धन पर आरोप है कि उसने बिचौलिए भरत मिश्रा और अजय सिंह पंवार के माध्यम से परीक्षा पास की थी और उसका 16 सितंबर 2012 को चयन हुआ था। इसके लिए आरोपित ने बिचौलियों को सात लाख रुपए दिए थे। सूत्रों की माने तो व्यापमं द्वारा नवंबर 2012 में प्रदेश के विभिन्न शहरों में आयोजित एसआई, सूबेदार और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा के दौरान व्यापमं के अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत से अयोग्य अभ्यर्थीयों को भर्ती कराया गया था।