भोपाल । जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि दुर्घटना के समय कमर्शियल वाहन की बीमा पॉलिसी वैध है और बीमा की अवधि के दौरान कोई घटना घट जाती है तो बीमा कंपनी ऐसे वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने की स्थिति में बीमा राशि देने से इंकार नहीं कर सकती। यदि बीमा कंपनी उस भरपाई को देने से इंकार करती है तो वह सेवा में कमी को दर्शाती है। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ पहुंचे एक मामले में फोरम ने यह टिप्पणी की है।फोरम के अध्यक्ष आरके भावे, सदस्य सुनील श्रीवास्तव और सदस्य क्षमा चौरे ने कंपनी को दो महीने के अवधि के अंदर 2,25,773 रुपए पर 75 प्रतिशत राशि क्लेम पर 9 प्रतिशत वार्षिक की दर से भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके अलावा 10,000 रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति एवं परिवाद व्यय के रूप में 3000 रुपए अलग से अदा करे।
     राजधानी के रामनगर कॉलोनी निवासी मोहम्मद सईद खान ने टीटी नगर स्थित जीटीवी कॉम्प्लेक्स स्थित नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिडेट के शाखा प्रबंधक के खिलाफ याचिका लगाई थी। उपभोक्ता मोहम्मद सईद खान ने जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष 2015 में याचिका लगाई। इसमें शिकायत की गई कि उपभोक्ता ने टाटा एलपीटी 2516 वाहन खरीदा। जिसकी बीमा प्रीमियम राशि 26,403 रुपए का भुगतान किया। जिसकी बीमा अवधि 19 सितंबर 2014 से 18 सितंबर 2015 तक के लिए थी। यह वाहन 28 सितंबर 2014 को दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद उपभोक्ता ने इसकी सूचना तत्काल बीमा कंपनी को दी। लेकिन बीमा कंपनी ने राशि देने से इसलिए इंकार कर दिया, क्योंकि घटना के दौरान अनाधिकृत पैसेंजर को गाड़ी में बैठाया गया था, जबकि बीमा कंपनी द्वारा अतिरिक्त प्रीमियम 200 रुपए कर्मचारी श्रमिक के लिए अलग से दिया गया था। मामले में बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि उपभोक्ता द्वारा वाहन का उपयोग नियम के विरुद्घ किया जा रहा था। वाहन में बैठक क्षमता से अधिक व्यक्तियों को दुर्घटना के समय अनाधिकृत रूप से बैठाया गया था। फोरम ने इस तर्क को खारिज कर दिया। फोरम ने कंपनी को दो महीने के अवधि के अंदर 2,25,773 रुपए पर 75 प्रतिशत राशि क्लेम पर 9 प्रतिशत वार्षिक की दर से भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके अलावा 10,000 रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति एवं परिवाद व्यय के रूप में 3000 रुपए अलग से अदा करे।