नई दिल्ली । वित्तीय संकट में फंसी जेट एयरलाइंस के कर्मचारियों की निष्टा अभी भी कंपनी को लेकर बनी हुई है और उन्होंने नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को चेतावनी दी है कि जेट के हिस्से के फ्लाइटस के स्लॉट दूसरी एयरलाइंस को आवंटित न करे। कर्मचारियों ने यह भी कहा है कि जब तक जेट के हिस्सेदारी की ब्रिकी के लिए बिडिंग प्रक्रिया पूरी नहीं होती, जेट के स्लॉट किसी को न दिए जाएं। कर्मचारियों ने यह भी कहा है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो उन्हें कानून की मदद लेनी पड़ेगी। जेट एयरवेज टेक्निकल एसोसिएशन ने डीजीसीए को इस बारे में पत्र लिखा है। जेट की फ्लाइट पूरी तरह से बंद होने के बाद नागर विमानन मंत्रालय और डीजीसीए यह चाहता था कि पैसेंजरों की सुविधा के लिए दूसरी एयरलाइंस को जेट के खाली स्लॉट अस्थायी तौर पर आवंटित कर दिए जाएं ताकि फ्लाइटस की संख्या को बढ़ाया जा सके। लेकिन एसोसिएशन का कहना है कि अभी जेट एयरवेज की बिक्री के प्रयास किए जा रहे हैं और बिडिंग प्रक्रिया होनी है। ऐसे में जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक जेट के हिस्से के स्लॉट दूसरी एयरलाइंस को न दिए जाएं। एसोसिएशन के मुताबिक ऐसा करना इसलिए जरूरी है, ताकि जेट की कीमत को बनाए रखा जा सके। जेट का ऑपरेशन पूरी तरह से बंद हो चुका है और अब इसकी बिक्री के लिए प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में उम्मीद है कि खरीददारों की लिस्ट मई के मध्य तक आ सकती है। जेट कर्मचारी चाहते हैं कि जेट के फ्लाइट के स्लॉट बरकरार रखे जाएं ताकि इस नजरिए से जेट की कीमत पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।