इंग्लैंड में ग्लूसस्टरशायर सेकंड्स टीम की ओर से खेलने वाले अफगानिस्तान मूल के इमरान मारुफ एक शरणार्थी हैं। ग्लूसस्टरशायर क्रिकेट बोर्ड के डेवलपमेंट अफसर मसूर खान ने इमरान को अवसर दिया जिससे आज वह एक गेंदबाज के तौर पर निखर रहे हैं और इंग्लैंड की टीम भी उनकी गेंदबाजी खेलकर अभ्यास कर रही है। इमरान का यहां तक का सफर बेहद डरावना रहा है। इस मुश्किल सफर में उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह करीब 2 साल का लंबा सफर रहा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान का बचपन हिसारेक में बीता जो काबुल और जलालाबाद के बीच में पड़ता है। उनके पिता सेना में कमांडर थे जिन्होंने तालिबान के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी। उनका बचपन गर्दिश में बीता। घर में बिजली तक नहीं थी, टेंट में भी रहे। 
हर महीने उनके परिवार को तालिबानी हमला झेलन पड़ता था। उन्होंने कहा, 'मैंने कभी उन्हें नहीं देखा, कभी उनसे नहीं मिला। हमेशा उनकी लड़ाई के बारे में सुनता था और एक दिन उन्होंने मेरे पिता को मुझसे छीन लिया। फिर कभी मैं अपने पिता से मिल नहीं पाया, ना कभी सुना कि उनके साथ क्या हुआ।' इसके बाद इमरान की मां ने एक एजेंट से संपर्क किया जो उन्हें देश से बाहर ले जाने के लिए कोशिशों में लग गया। तब वह 14 साल के थे। वहीं से उनका सफर शुरू हुआ, तब वह जानते भी नहीं थे कि आखिर कहां जा रहे हैं। हर दिन वह अपना बैग पैक करते और एक कार की डिग्गी में 3 अन्य के साथ बैठ जाते। 
इमरान अफगानिस्तान से पाकिस्तान गए और फिर वहां से ईरान होते हुए तुर्की पहुंचे। उन्होंने कहा कि जब वह अफगानिस्तान से पाकिस्तान की तरफ जा रहे थे तो उन्हें अन्य कुछ और लोगों के साथ काफी पैदल चलना पड़ा। वहां काफी गर्मी थी और पानी भी नहीं था। तब वह बेहद डरे हुए थे। बहुत से  लोग रो रहे थे क्योंकि एजेंट उनके साथ मारपीट रहे थे। वह करीब 7 महीने ईरान में रहे और ज्यादातर समय तेहरान के नजदीक ही बीता। जब वह किसी तरह बोग्नोर रेगिस पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। बाद में वह शरणार्थी की तरह रहे और उन्हें ग्लूसस्टरशायर क्रिकेट बोर्ड के डेवलपमेंट अफसर मसूर की नजरें उनपर पड़ी और यहीं से उनके क्रिकेटर बनने का सिलसिला शुरु हुआ।