इन्दौर । राम नाम की महिमा सबसे निराली और अपरंपार है। जन्म से लेकर मृत्यु तक राम का नाम सबके साथ बना रहता है। राम से बड़ा राम का नाम माना गया है। भगवान शिव को भी राम नाम अत्यंत प्रिय है। दो अक्षर के इस नाम में समूचे विश्व की श्रद्धा, आस्था और भक्ति समाहित है। जन-जन के मन में रचे-बसे राम नाम का नियमित सुमिरन और जाप प्राणीमात्र के लिए कल्याणकारी है। 
अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के आचार्य जगदगुरू स्वामी रामदयाल महाराज ने आज अग्रवाल नगर ओल्ड भूमि स्थित ‘रामांश’ पर आयोजित सत्संग सत्र में जिज्ञासु भक्तों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए उक्त दिव्य बातें कही। प्रारंभ में श्रीमती चंद्रकला कचोलिया, वंदना देवी, डॉ. सरिता निचानी, संजय बिडला, मुकेश राय, दिनेश माहेश्वरी, डॉ. विजय निचानी, वेणुगोपाल असावा, सरलता सोनी आदि ने आचार्यश्री का स्वागत किया। संचालन मुकेश कचोलिया ने किया। संयोजक आशीष एवं अमित कचोलिया ने बताया कि आचार्यश्री के सान्निध्य में यहां 23 मई तक प्रतिदिन सांय 4.30 से 5.30 बजे तक जिज्ञासा व समाधान, सांय 7 से 8 बजे तक आरती एवं प्रवचन होंगे। बुधवार 22 मई को द्वारका मंत्री की भजन संध्या एवं गुरूवार 23 मई को अभय माणके दंपत्ति द्वारा गीत रामायण के आयोजन भी रात्रि 8.30 बजे से होंगे। 
आचार्यश्री ने कहा कि बच्चों की पहली पाठशाला घर से शुरू होती है। घर में बालक जैसा माहौल और परिवेश देखता है, उसके कोमल मन में उनकी अमिट छाप बन जाती है। संस्कार के अभाव में मनुष्य को पशु कहा गया है। यदि संस्कारों की बुनियाद मजबूत रहेगी तो परिवार, समाज और राष्ट्र भी लाभान्वित होते हैं इसीलिए हर मौके पर संस्कारों की दृढ़ता का आव्हान किया जाता है। संस्कारों और संस्कृति पर ही बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की महती जिम्मेदारी है। वर्तमान युग में संस्कारों में कमी की बात सामने आती है लेकिन यदि परिवार और पर्यावरण में श्रेष्ठ विचारों का सृजन होता है तो हम एक अच्छे समाज की स्थापना कर सकते हैं।