लंदन: क्रिकेट विश्व कप (ICC Cricket World Cup 2019) का 12वां एडीशन बेहद करीब आ गया है. इंग्लैंड में होने वाले आईसीसी विश्व कप (World Cup 2019) में अब महज चार दिन की दूरी है. 30 मई को मेजबान इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के मुकाबले से क्रिकेट का महाकुंभ शुरू हो जाएगा. पुरुषों का पहला क्रिकेट विश्व कप 1975 में खेला गया था. विश्व कप ने अपने 44 साल के इतिहास में कई रोमांचक मुकाबले देखे हैं लेकिन यहां पांच यादगार मैचों का जिक्र कर रहे हैं.

विश्व कप-1975 का सेमीफाइनल और गिलमौर...
टूर्नामेंट का मेजबान इंग्लैंड चिरप्रतिद्वंद्वी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व कप सेमीफाइनल से पहले डेनिस लिली और जेफ थामसन से मिलने वाली चुनौती से वाकिफ था. लेकिन उसे उनकी बजाय गैरी गिलमौर (Gary Gilmore) की स्विंग गेंदबाजी ने पस्त कर दिया. इस 23 साल के गेंदबाज ने 14 रन देकर छह विकेट अपने नाम किए, जिससे इंग्लैंड की टीम महज 93 रन पर सिमट गई. गिलमौर के प्रदर्शन के बाद हालांकि ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 39 रन पर छह विकेट खो दिए. इसके बाद क्रिस ओल्ड ने अपने घरेलू मैदान हेडिंग्ले में तीन विकेट चटका दिए. फिर गिलमौर बल्लेबाजी के लिये उतरे. गिलमौर की 28 रन की नाबाद पारी और डग वाल्टर्स के साथ नाबाद भागीदारी से ऑस्ट्रेलिया फाइनल में पहुंच गया. 

1983 विश्व कप: कपिल का शतक, जिसका प्रसारण नहीं हुआ 
जिम्बाब्वे की टीम ऑस्ट्रेलिया को हराने के बाद एक और उलटफेर की ओर बढ़ रही थी और उसने भारत के 17 रन पर पांच विकेट उखाड़ लिए थे. लेकिन भारतीय कप्तान कपिल देव (Kapil Dev) ने 138 गेंद में 175 रन की शानदार पारी खेली. इस पारी का लुत्फ टनब्रिज वेल्स में नेविल मैदान में मौजूद दर्शक की उठा सके क्योंकि बीबीसी टैक्नीशियन हड़ताल पर थे. इससे इस मैच का टीवी पर प्रसारण नहीं हो पाया था. कपिल की शतकीय पारी से भारत ने 266 रन का स्कोर बनाया जो जिम्बाब्वे के लिए काफी ज्यादा साबित हुआ. कपिल का शतक उनकी शानदार नेतृत्व क्षमता का उदाहरण था, जिन्होंने एक हफ्ते बाद ही भारत को चैंपियन बना दिया गया. 

1999 विश्व कप: टाई मैच में जीता ऑस्ट्रेलिया 
यह शायद विश्व कप का सबसे रोमांचक मैच था, एजबेस्टन में इस सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने 213 रन बनाए. इसमें दक्षिण अफ्रीका के शॉन पोलाक ने 36 रन देकर पांच विकेट चटकाए थे. दक्षिण अफ्रीका को अंतिम ओवर में नौ रन की दरकार थी. लांस क्लूजनर (Lance Klusener) ने दो चौके लगा दिए. अब वह जीत से एक रन दूर था और एक विकेट बचा था. क्लूजनर ने गेंद मिड-आफ की ओर भेजा और एक रन के लिए भाग लिए. नान-स्ट्राइकर छोर पर खड़े एलन डोनाल्ड ने उनकी आवाज नहीं सुनी और अपना बल्ला गिरा दिया. मार्क वॉ ने गेंद लेकर इसे गेंदबाज डेमियन फ्लेमिंग की ओर फेंक दिया. फ्लेमिंग ने तुंरत ही इसे विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट की ओर फेंक दिया, जिन्होंने रन आउट कर दिया. हालांकि मैच टाई रहा, लेकिन ऑस्ट्रेलिया बेहतर नेट रन रेट की बदौलत फाइनल में पहुंच गया. 

2011 विश्व कप: ओब्रायन ने इंग्लैंड को पस्त किया 
इंग्लैंड ने आयरलैंड (तब टेस्ट दर्जा प्राप्त नहीं था) के खिलाफ बल्ले से काफी अच्छा प्रदर्शन किया और सात विकेट पर 327 रन बनाए. विश्व कप मैच में पहले कभी भी किसी टीम ने इतने बड़े स्कोर का पीछा नहीं किया था. लेकिन बेंगलुरू में केविन ओब्रायन (kevin o'brien) ने विश्व कप इतिहास में सबसे तेज शतक जड़ते हुए आयरलैंड को तीन विकेट से शानदार जीत दिलाई. उन्होंने ऐसा महज 50 गेंद में किया, जिसमें 13 चौके और छह छक्के जड़े थे. ओब्रायन के आने से पहले आयरलैंड की टीम पांच विकेट पर 111 रन पर थी. 
2015 विश्व कप : इलियट ने दक्षिण अफ्रीका का दिल तोड़ा 
फाफ डु प्लेसिस और एबी डिविलियर्स की बदौलत दक्षिण अफ्रीका ने सेमीफाइनल में 43 ओवर में पांच विकेट पर 281 रन बनाए थे, तभी बारिश आ गई. इसके बाद मैच 43-43 ओवर का कर दिया गया. न्यूजीलैंड को 298 रन का लक्ष्य मिला. न्यूजीलैंड के लिए ऑलराउंडर ग्रांट इलियट ने अपनी जिंदगी की बेहतरीन पारी खेली. जोहानिसबर्ग में जन्मे इलियट 2001 में न्यूजीलैंड में चले गए थे. न्यूजीलैंड को जीत के लिये पांच रन की दरकार थी और उसकी दो गेंद बची थी जब इलियट ने तेज गेंदबाज डेल स्टेन की गेंद पर मिड-आन पर शानदार छक्का जड़कर टीम को जीत दिलाई. यह उनकी नाबाद 84 रन की मैच विजयी पारी का अंतिम शॉट था, जिससे न्यूजीलैंड की टीम अपने पहले विश्व कप फाइनल में पहुंची. इससे पहले उसे छह सेमीफाइनल में हार मिली थी.