मुंबई । केंद्र सरकार के अंर्तगत आनेवाले कॉरपोरेट मंत्रालय (मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स) ने आईएलएंडएफएस ग्रुप के कुछ पुराने संचालकों के बैंक खातों को सीज कराने और उनकी संपत्तियों को जब्त कराने के लिए अदालत जा सकती है। मामले के जानकार सूत्र ने कहा कि मिनिस्ट्री आईएलएंडएफएस मामले की जांच का दायरा बढ़ाने के लिए जल्द अर्धन्यायिक संस्था नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (एनसीएलटी) के पास अप्लाई करेगी। कोर्ट ने आईएलएंडएफएसग्रुप के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टरों के ऐसेट्स जब्त कराए हैं। एक वरिष्ठ वकील ने कहा, 'एमसीए अदालत से मामले में जारी किए गए पुराने ऑर्डर्स का दायरा बढ़ाकर उसमें कुछ नॉन एग्जिक्युटिव बोर्ड मेंबर्स सहित पुराने डायरेक्टर्स को लाने का अनुरोध कर सकती है। हमें यह मालूम नहीं है कि क्या जांच के दायरे में फॉर्मर ऑडिटर को भी लाया जाएगा।' मिनिस्ट्री ने गीतांजलि ग्रुप मामले में ऐसी ही प्रक्रिया अपनाई थी, जिस पर अनऑथराइज्ड लेटर ऑफ अंडरटेकिंग या गारंटी के इस्तेमाल करके सरकारी बैंकों के फंड का गोलमाल करने का आरोप लगा था।
मिनिस्ट्री इस आधार पर आईएलएंडएफएस के डायरेक्टर्स को हटाए जाने के अनुरोध के साथ पहले पहल 1 अक्टूबर 2018 को एनसीएलटी में गई थी कि रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की जांच का नतीजा पहली नजर में यह निकला था कि उसमें मिसमैनेजमेंट और कॉर्पोरेट गवर्नेंस नॉर्म्स के साथ समझौता हुआ है और ग्रुप ने अंधाधुंध तरीके से शॉर्ट और लॉन्ग टर्म उधारी जुटाई है। अदालत की तरफ से ऐसेट फ्रीज किए जाने का अंतरिम आदेश होने के बाद एकाउंटहोल्डर्स के भरण पोषण के लिए सीमित मात्रा में फंड की निकासी की इजाजत दी जाएगी।
इस बीच पता चला है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने आईएलएंडएफएस के कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की कॉस्ट बढ़ा चढ़ाकर दिखाए जाने के संदेह के चलते मामले की जांच की संभावनाएं तलाशने के लिए पिछले हफ्ते इनवेस्टिगेशन डिवीजन के मीटिंग की थी। सूत्र ने बताया, 'यह पता लगाने के लिए आईटीएनएस (आईएलएंडएफएस ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क्स इंडिया लिमिटेड) और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स बनाने के लिए शुरू किए गए कई स्पेशल पर्पज वहीकल के बही खातों की जांच करने की जरूरत होगी कि क्या फर्जी इनवॉयस बनाए गए थे, ऑडिटर का रोल क्या था और डॉक्युमेंटेशन का नेचर क्या था?' आईएलएंडएफएस ग्रुप की सबसे बड़ी कंपनी आईटीएनएल है।