नई दिल्ली: शिक्षाविद् और 'सुपर 30' कोचिंग संस्थान के संस्थापक आनंद कुमार का कहना है कि पटना में वंचित बच्चों को शिक्षित करने का सफर जारी रखने में उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. बच्चों को शिक्षित करने में अपने सामने आईं बाधाओं के लिए उन्होंने छोटे शहरों के लोगों की केकड़े वाली मानसिकता को जिम्मेदार ठहराया. 

कुमार ने कहा, 'बात जब मुंबई जैसे बड़े शहर की आती है तो वहां कई मशहूर हस्तियां हैं जो एकता से रह रहे हैं और कोई व्यक्ति किसी और को नीचे नहीं गिराना चाहता. लेकिन छोटे शहरों में ऐसा नहीं है और यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.' उन्होंने कहा कि छोटे शहरों में केकड़े की मानसिकता मौजूद है और इसलिए कई प्रभावशाली लोग किसी भी ऐसे व्यक्ति को प्रताड़ित करने लगते हैं और उसे नीचे गिराने लगते हैं जो कुलीन या विशेष समाज से नहीं आता हो. उन्होंने आईपीएस अधिकारी और शिक्षाविद् अभयानंद के साथ साल 2002 में इस उद्देश्य के साथ 'सुपर 30' कार्यक्रम की शुरुआत की थी कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की संयुक्त प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को निशुल्क तैयारी कराई जाए. 
कुमार किसी व्यक्ति या संस्था से कोई आर्थिक सहायता नहीं लेते और इस शिक्षा कार्यक्रम के लिए सारा धन खुद मुहैया कराते हैं. कुमार ने कहा, 'जबसे मैंने 'सुपर 30' शुरू किया है, तबसे मेरी मंशा उन योग्य छात्रों को उनका सपना पूरा करने का मौका दिलाना रहा है और कोशिश रही कि खराब आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें कभी परेशानी नहीं होनी चाहिए.' कुमार ने कहा, 'बेशक मुझे जान से मारने की धमकियां भी मिली हैं, मेरे परिवार को परेशानी हुई है और मैं जानता हूं कि हमें इससे भी ज्यादा सहना है लेकिन वे हमें रोक नहीं सकते.'
ऋतिक रोशन की मुख्य भूमिका वाली 'सुपर 30' फिल्म 12 जुलाई को रिलीज हो रही है. कुमार को उम्मीद है कि उनकी कहानी युवाओं को उनके सपने पूरा करने के लिए प्रेरणा देगी. उन्हें विश्वास दिलाएगी कि 'कठिन परिश्रम का फल हमेशा मिलता है, इससे फर्क नहीं पड़ता कि आप किस पृष्ठभूमि से आते हैं.' विकास बहल द्वारा निर्देशित 'सुपर 30' फिल्म को रिलीज से पहले कुछ परेशानियां हुईं, लेकिन कुमार ने कहा कि उन्हें परिस्थितियों से कभी चिंता नहीं हुई.