बेंगलुरु: कर्नाटक में जारी सियासी संकट के बीच कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार असंतुष्ट विधायकों से मिलने के लिए मुंबई के लिए रवाना हो गए हैं. न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार नाराज चल रहे विधायकों से मिलने के लिए मुंबई के सोफीटेल होटल पहुंचेंगे. वहीं, बताया जा रहा है कि कर्नाटक के निर्दलीय विधायक आर शंकर ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है.  खबर है कि आर शंकर भी मुंबई जाकर नाराज विधायकों से बात कर सकते हैं.

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने सोमवार को पार्टी विधायकों की बैठक से पहले बड़ा बयान दिया है. येदियुरप्पा ने कहा कि बीजेपी विधायकों की बैठक होने वाली है और हम इसमें उचित निर्णय लेंगे. उन्होंने कहा कि मंगलवार को बीजेपी कार्यकर्ता प्रदर्शन करेंगे, क्योंकि कांग्रेस और जेडीएस के गठबंधन की सरकार ने बहुमत खो दिया है. उन्होंने कहा कि हमारी मांग होगी कि सीएम कुमारस्वामी तत्काल इस्तीफा दें और कर्नाटक की जनता भी यही चाहती है.

येदियुरप्पा ने कहा कि कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की सरकार ने बहुमत खो दिया है. इस स्थिति में उनके पास सरकार को चलाने का कोई नैतिक आधार नहीं है. उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार के अल्पमत में आने के कारण ही हम मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांग रहे हैं. 


कर्नाटक में संकट में चल रही जेडीएस और कांग्रेस की गठबंधन सरकार की हालत सोमवार को तब और ज्यादा नाजुक हो गई, जब लघु उद्योग मंत्री एच नागेश ने मंत्री पद से इस्तीफा देकर 13 महीने पुरानी गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया. राज्यपाल वजुभाई वाला को लिखे पत्र में नागेश ने कहा, "मैंने आज (मुख्यमंत्री) एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाले मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया है." नागेश ने शहर के मध्य स्थित राजभवन में वाला को अपना इस्तीफा सौंपा. उन्होंने पत्र में यह भी कहा है कि वह 13 महीने पुरानी सरकार से अपना समर्थन वापस ले रहे हैं.

नागेश ने पत्र में लिखा, "इस पत्र के माध्यम से आपको यह भी सूचित करना चाहूंगा कि मैं कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली सरकार से अपना समर्थन वापस ले रहा हूं." नागेश ने राज्यपाल से यह भी कहा है कि वह कोलार जिले की मुलबगल (अनुसूचित जाति) विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक के तौर पर निर्वाचित हुए थे.

नागेश को बमुश्किल एक महीने पहले ही 34 सदस्यीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था. उनके साथ क्षेत्रीय पार्टी केपीजेपी (कर्नाटक प्रज्ञावंतारा जनता पक्ष) के आर. शंकर को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था, ताकि दिसंबर से ही बगावत पर उतारू कांग्रेस के लगभग दर्जन भर विधायकों की धमकी से उत्पन्न खतरे से गठबंधन सरकार को बचाया जा सके. 


नगर निकाय मंत्री शंकर ने भी कांग्रेस के अन्य 20 मंत्रियों के साथ अपना इस्तीफा कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया को सौंप दिया, ताकि दर्जन भर बागी विधायकों के इस्तीफा वापस लेने और उन्हें मंत्री बनाए जाने का रास्ता साफ हो सके, और गठबंधन सरकार को 12 जुलाई से शुरू हो रहे 10 दिवसीय मॉनसून सत्र से पहले गिरने से बचाया जा सके. यह दूसरा मौका है, जब नागेश और रन्नेबेन्नूर सीट से विधायक शंकर ने गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस लिया है. इससे पहले उन्होंने 22 दिसंबर को मंत्री पद से हटाए जाने के बाद 15 जनवरी को सरकार से समर्थन वापस ले लिया था.

कांग्रेस ने कर्नाटक में सरकार के संकट के लिए भाजपा पर आरोप लगाया है. कांग्रेस विधायक डीके सुरेश ने संवाददाताओं से कहा, "राज्य में इस राजनीतिक संकट के पीछे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय नेताओं का हाथ है. वे किसी भी राज्य में कोई सरकार या किसी विपक्षी दल की सरकार नहीं चाहते हैं. वे लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं." भाजपा के नेताओं ने इस आरोप पर पलटवार किया है. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में कहा, "कर्नाटक में राजनीतिक संकट से भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है."