नई दिल्ली । अरुणाचल प्रदेश के स्थापना दिवस पर गृह मंत्री अमित शाह के दौरे को लेकर चीन ने आपत्ति जताई तो भारत ने कहा कि यह बेवजह है और अरुणाचल भारत का अभिन्न हिस्सा है।  दरअसल, चीन ने भारत को सीमा मुद्दे को पेचीदा करने की चेतावनी दी है। भारत की संप्रभुता को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने पेइचिंग में मीडिया से कहा, ‘चीन सरकार ने अरुणाचल प्रदेश को कभी मान्यता नहीं दी है और शाह की यात्रा का हम विरोध करते हैं।’ 
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने पत्रकारों से कहा, 'भारत का हमेशा से रुख रहा है कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न हिस्सा है जिसे अलग नहीं किया जा सकता।' गृह मंत्री अमित शाह की अरुणाचल यात्रा पर चीन की आपत्ति से जुड़े सवाल पर रवीश कुमार ने कहा कि भारत के नेता समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पर जाते रहते हैं, जैसा कि वे देश के अन्य इलाकों में जाते हैं और भारतीय नेता की अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पर चीन की आपत्ति बेवजह है।
अरुणाचल प्रदेश ठीक 33 साल पहले 1987 में आज ही के दिन यानी 20 फरवरी को एक केंद्र शासित प्रदेश से पूर्ण राज्य बना था। यह क्षेत्र 1913-14 में ब्रिटिश भारत का हिस्सा था और औपचारिक रूप से तब शामिल किया गया था, जब 1938 में भारत और तिब्बत के बीच सीमा के तौर पर मैकमोहन रेखा स्थापित हुई थी।वहीं, चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत क्षेत्र का एक हिस्सा मानता है इसलिए वह प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्रियों के अरुणाचल प्रदेश के दौरे को लेकर अपनी आपत्ति जताता रहा है।
शाह गुरुवार को अरुणाचल प्रदेश के स्थापना दिवस कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे जिसपर चीन ने आपत्ति जताई और कहा कि यह पेइचिंग की क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन है और आपसी राजनीतिक विश्वास पर प्रहार करती है। चीन ने कहा कि वह अमित शाह की यात्रा का 'दृढ़ता से विरोध' करता है। शाह राज्य के 34वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए गुरुवार को अरुणाचल प्रदेश गए । इस दौरान उन्होंने उद्योग और सड़कों से जुड़ी अनेक परियानाओं की शुरुआत की।