नई दिल्ली. दोपहर के तीन बजे हैं (मंगलवार) और चांद बाग का माहौल अब पहले से कहीं ज्यादा तनावपूर्ण बन गया है। दोनों ही पक्षों में भय का माहौल और आक्रोश दोनों साफ-साफ देखा जा सकता है। नागरिकता संशोधन कानून के पक्ष और विपक्ष की बात अब कहीं पीछे छूट चुकी है और माहौल पूरी तरह से सांप्रदायिक हो चुका है। चंदू नगर की तंग गलियों में मोटर साइकल से गुजरता एक नौजवान जब रुककर स्थानीय लोगों से शेरपुर चौक जाने का रास्ता पूछता है तो एक स्थानीय व्यक्ति उसे फिलहाल वहां न जाने की सलाह देता है। तभी वहां मौजूद दूसरा व्यक्ति बाइक सवार से सवाल करता है, ‘तुम हिंदू हो या मुसलमान?’ बाइक सवार जवाब में बताता है कि वो हिंदू है, तो सवाल करने वाला कहता है- ‘हिंदू हो तो निकल जाओ। शेरपुर चौक जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। कोई रोके तो बता देना कि तुम हिंदू हो।’

चंदू नगर की गलियों से लेकर बाहर करावल नगर रोड तक अब हजारों की संख्या में लोग लाठी-डंडे लिए निकल पड़े हैं। तकरीबन हर गली के बाहर ईंट-पत्थर जमा किए जा चुके हैं। लोग बड़े-बड़े कपड़ों या बोरों में पत्थर भरकर उन्हें मुख्य सड़क पर जमा कर रहे हैं। कई महिलाएं अपने बच्चों के लिए फिक्रमंद हैं और उन्हें घर के अंदर चलने को कह रही हैं, लेकिन कई बच्चे ऐसे भी हैं जो पत्थर जुटाने में बड़ों का पूरा सहयोग कर रहे हैं। उधर, न्यू मुस्तफाबाद में भी माहौल अब बदलने लगा है। यहां भी लड़के बोरों में पत्थर भरकर गली के मुहाने तक ले आए हैं। हालांकि, यहां लोगों में हिंदू बहुल इलाकों की तुलना में भय ज्यादा है। लोगों को शिकायत भी है कि इस दौरान पुलिस खुले तौर से एक पक्ष के साथ खड़ी है और हिंसा में उनकी मदद कर रही है।

न्यू मुस्तफाबाद के रहने वाले यूनुस परेशान हैं और पत्रकारों को देखते ही लगभग दौड़ते हुए वे उनके पास आते हैं। उनका 16 साल का बेटा यूसुफ तीन दिन से लापता है। उसकी फोटो दिखाते हुए वो पत्रकारों से कहते हैं, ‘मेरा बेटा तीन दिन से घर नहीं लौटा है। प्लीज इसे खोजने में हमारी मदद कीजिए।’ पूछने पर यूनुस बताते हैं कि उन्होंने तीन दिन बीत जाने के बाद भी बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज नहीं करवाई है। वो कहते हैं, ‘रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए पुलिस के पास जाना होगा। सौ नंबर पर भी अगर मैं शिकायत करूं तो भी पुलिस मुझे थाने आने को कहेगी। इस माहौल में पुलिस थाने जाने की न तो हिम्मत जुटा पा रहा हूं और न ही भरोसा।’

 

भजनपुरा चौक से करावल नगर रोड की तरफ सुबह से जो इक्का-दुक्का गाड़ियां चल रही थी, अब वो भी पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। ये सड़क अब दो हिस्सों में बंट चुकी है। चौक से क़रीब पांच सौ मीटर आगे तक का हिस्सा एक पक्ष का है और उससे आगे का हिस्सा दूसरे पक्ष का। इस रोड पर क्षेत्रीय पार्षद ताहिर हसन का एक कार्यालय है। इस कार्यालय के पास ही वह अदृश्य ‘बॉर्डर’ है जो बाहर से आए लोगों को नहीं दिखता लेकिन स्थानीय लोग जानते हैं कि इससे आगे का हिस्सा दूसरे पक्ष का है। ताहिर हसन के दफ्तर के बाहर ही सीआरपीएफ के कुछ अधिकारी बैठे हैं। इनमें से एक अधिकारी ज़मीन पर पड़े गोलियों के कुछ खोखे उठाकर अपने साथी को दिखाते हैं और पहचानते हुए कहते हैं, ‘ये गोलियां पुलिस की नहीं हैं। जिस पिस्टल से ये चलाई गई हैं वो पुलिस के पास नहीं होती हैं।’ यहीं मौजूद स्थानीय व्यापारी इस्माइल उनकी बात से हामी भरते हुए कहते हैं, ‘हां, ये गोलियां दंगाइयों ने ही चलाई हैं। कल यहां दोनों पक्षों की ओर से जमकर गोलियां भी चलाई गई हैं।' ठीक साढ़े तीन बजे सीआरपीएफ के ये अधिकारी अपनी गाड़ियों में बैठ कर रवाना हो जाते हैं। इसके साथ ही सीआरपीएफ की वह टुकड़ी भी वापस लौटने लगती है, जो बीती रात आठ बजे से यहां तैनात थी। तीन बजकर 40 मिनट तक इस इलाके में मौजूद सभी सुरक्षा बल लौट जाते हैं। हैरानी इसलिए होती है कि अब तक कोई अन्य सुरक्षा बल इनकी जगह लेने नहीं आया है। लिहाजा अब यह इलाका पूरी तरह से दंगाइयों के कब्जे में हो चुका है।

ऐसा होने के दस मिनट के भीतर ही दोनों पक्षों के हज़ारों लोग करावल नगर मेन रोड पर आमने-सामने आ चुके हैं और 3 बजकर 50 मिनट पर यहां पत्थरबाज़ी शुरू हो जाती है। अब मौके पर कोई सुरक्षाबल नहीं है। सिर्फ दंगाइयों में तब्दील हो चुके लोग हैं जो एक दूसरे पर ईंट, पत्थर और पेट्रोल बम बरसा रहे हैं। दोनों पक्षों ने ही अपनी ढाल के रूप में बड़े-बड़े टिन और प्लाई बोर्ड आगे रखे हैं और इनके पीछे से पत्थरबाज़ी हो रही है। निगम पार्षद ताहिर हसन का कार्यालय चार मंजिला इमारत में है। इस इमारत की छत पर कई लड़के हेलमेट पहने खड़े हैं और ऊपर से पत्थर चला रहे हैं। साफ है कि इस इमारत से पत्थर चलाने की तैयारी बहुत पहले से की गई है, तभी इतनी संख्या में पत्थर चार मंजिला इमारत की छत पर हैं। करीब आधे घंटे की लगातार पत्थरबाजी के बाद करावल नगर की ओर से पुलिस की एक गाड़ी भीड़ के बीच आती है। इस गाड़ी के आते ही भीड़ ‘भारत माता की जय’ और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते हुए कुछ और आगे बढ़ती है। गाड़ी में से उतरा एक पुलिसकर्मी आंसू गैस का गोला दूसरे पक्ष की तरफ दागता है तो ‘जय श्री राम’ की गूंज कुछ और ऊंची हो जाती है। किसी भी व्यक्ति के लिए इस दृश्य पर विश्वास करना मुश्किल होता है कि पुलिस खुले आम दंगाइयों के बीच मौजूद है और एक पक्ष के साथ खड़े होकर दूसरे पक्ष को निशाना बना रही है। दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में ये पक्ष कई बार ‘दिल्ली पुलिस जिंदाबाद’ के नारे लगाता है। पुलिस के सामने आई इस भीड़ में शामिल लोग पत्थर चला रहे हैं, पेट्रोल से भरी कांच की बोतलों में रस्सी डालकर उसे पेट्रोल बम बना रहे हैं और आगजनी कर रहे हैं। बीच-बीच में जब कभी दूसरा पक्ष हावी हो रहा है तो दिल्ली पुलिस के जवान इस ओर मौजूद दंगाइयों का हौसला बढ़ाने का काम भी कर रहे हैं। करीब एक घंटा पत्थरबाजों के पीछे रहने और समय-समय पर आंसू गैस दागने के बाद पुलिस की यह टुकड़ी उनसे आगे बढ़ती है।

साढ़े पांच बजे पत्थरबाजी उस वक्त थमती है जब पुलिस आगे बढ़कर दोनों पक्षों से शांत होने की अपील करती है। लेकिन पांच मिनट के भीतर ही कोशिश नाकाम हो जाती और दोनों ओर से इतनी तेज पत्थर बरसने लगते हैं कि अब पुलिस को मजबूरन पीछे दौड़ना पड़ रहा है। यहां भी पीछे लौटते हुए पुलिस दंगाइयों को आगे जाकर मोर्चा संभालने की बात कहती जाती है। दंगाइयों की इस भीड़ में कई लोग पत्थर चला रहे हैं, कई पत्थर जमा कर रहे हैं तो कई सिर्फ इस पर नजर बनाए हुए हैं, कि कहीं कोई इस घटना का फोटो या वीडियो तो नहीं उतार रहा। वीडियो बनाने की यह मनाही दोनों तरफ बराबर है। कहीं किसी छत पर भी अगर कोई वीडियो बनाता लग रहा है तो ये भीड़ उस पर टूट पड़ती है। कई इलाकों में पत्रकारों के कैमरे भी इस दौरान तोड़ दिए गए हैं। दंगाई आपस में भी एक-दूसरे को वीडियो बनाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में हो रही यह हिंसा कई घंटों तक यूं ही जारी रहती है। इस दौरान पत्थर से लेकर गोलियां और पेट्रोल बम तक दोनों ही तरफ से चलाए जाते हैं, लेकिन पुलिस की मौजूदगी एक ही पक्ष में है, लिहाजा उनका निशाना भी एक ही पक्ष पर है।

बैनर-पोस्टर थामे शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर अक्सर लाठी चार्ज करने के लिए कुख्यात दिल्ली पुलिस का यह नया अवतार है जो पत्थर फेंकते, बम मारते दंगाइयों पर एक भी लाठी नहीं उठा रही। बल्कि उनके साथ मिलकर सामने वालों को निशाना बना रही है। कई घंटों की पत्थरबाजी के बाद करीब साढ़े 6 बजे पुलिस यहां से वापस लौटती है। इस दौरान दंगाइयों ने पार्षद ताहिर हसन के उस कार्यालय को कई प्रयासों के बाद अंततः आग के हवाले कर दिया है, जिसकी छत से लगातार इस तरफ पत्थर बरसाए जा रहे थे। पेट्रोल बम मारकर लगाई गई इस आग से इस बिल्डिंग की पहली मंजिल की बालकनी में रखी चीजें और इलेक्ट्रॉनिक आइटम जलाए जा चुके हैं। लेकिन भीड़ की कोशिश है कि ताहिर हसन की पूरी बिल्डिंग को पूरी तरह जला दिया जाए।

लगभग सात बजे सुरक्षा बलों की कम्बाइंड यूनिट, जिसमें आरएएफ, एसएसबी, सीआरपीएफ और दिल्ली पुलिस के जवान शामिल हैं, उस तरफ से दाखिल होती है, जहां से मुस्लिम पक्ष के लोग पत्थर चला रहे हैं। अब कई घंटों की पत्थरबाजी के बाद हिंदू पक्ष की ओर पहला आंसू गैस का गोला फेंका गया है। कुछ ही मिनट में ऐसे कई सुरक्षा बल इस तरफ आते हैं, जिससे यहां मौजूद भीड़ छंट जाती है। सुरक्षा बल अब तक मुस्लिम पक्ष के लोगों को वापस भेज चुके हैं और उधर से पत्थर चलना पूरी तरह बंद हो चुका है। इस मौके पर हिंदू पक्ष के कुछ लोग ताहिर हसन के कार्यालय की बिल्डिंग के बिलकुल नजदीक जाकर पेट्रोल बम मारते हैं। इससे जब जब बिल्डिंग में आग नहीं लगती तो बाकायदा सिलेंडर मंगवाया जाता है। ये सब पुलिस की मौजूदगी में हो रहा है। दंगाई खुलेआम पुलिस को कह रहे हैं कि ‘इस बिल्डिंग को पूरी तरह जलाए बिना वापस नहीं जाएंगे।’ सुरक्षा बलों की बड़ी टुकड़ी अब दंगाइयों को पीछे भेजने के लिए मना रही है। अब भी एक भी लाठी पुलिस ने नहीं चलाई है, बल्कि पुलिसकर्मी इन दंगाइयों को यह कहते हुए वापस जाने को कह रहे हैं कि ‘चलो भाई अब बहुत हो गया।’ वापस लौटते दंगाई लगातार ‘दिल्ली पुलिस ज़िंदाबाद के नारे लगा रहे हैं।’

सड़कें खाली होने के बाद दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर सतीश गोलचा मौके का मुआयना करने पहुंचे हैं। उनसे जब पूछा गया कि ‘सुबह से दंगे जैसा माहौल होने के बाद भी बीच में क्यों सुरक्षा बलों को पूरी तरह हटा लिया गया था?’ उनका जवाब साफ है- ‘मैं यहां कोई बाइट देने नहीं आया हूं।’ सतीश गोलचा के साथ ही यहां आई सुरक्षा बलों की कई टुकड़ियां भी वापस लौट रही हैं। इनके लिए कई बसें भजनपुरा चौक पर खड़ी हैं जिनमें आगे ‘ऑन स्पेशल ड्यूटी’ लिखा हुआ है। ये गाड़ियाँ ठीक उस मजार के पास खड़ी हैं, जिसमें कल आग लगा दी गई थी। इस वक्त कुछ लड़के हथौड़ा लेकर मजार की दीवार पर मार रहे हैं और इससे बमुश्किल 20 मीटर दूर बसों में बैठे सुरक्षा बलों को यह नजर नहीं आ रहा है।

रात के साढ़े नौ बज चुके हैं और अब तक टीवी पर यह खबर चलने लगी है कि दिल्ली के हिंसाग्रस्त इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। भजनपुरा चौक से अंदर करावल नगर रोड पर काफी दूर तक यह कर्फ्यू महसूस भी होता है, क्योंकि सभी गलियों के मुख्य गेट पर ताले लग चुके हैं और यहां अब ड्यूटी पर आए जवान हर आने वाले को रोक रहे हैं। लेकिन यहां से कुछ आगे बढ़ने पर चंदू नगर में कर्फ्यू का कोई निशान नहीं है। यहां लोग अब भी सड़कों पर हैं और उनके हाथों में अब भी लाठी-डंडे हैं। रात के साढ़े ग्यारह बजे भजनपुरा से समीर हैदर, मुस्तफाबाद गली नंबर-1 से वहीर अहमद और चांदबाग से मोहम्मद कयूम पत्रकारों को फोन करके बस एक ही सवाल पूछ रहे हैं- ‘सर अगर यहां कर्फ्यू लगा है तो पास के मोहल्लों में कैसे लोग अब भी खुलेआम घूमते हुए भड़काऊ नारे लगा रहे हैं? क्या कर्फ्यू भी धर्म के आधार पर लागू हुआ है?’