नाबालिग से रेप का मामला:भोपाल में सगे फूफा को आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा; पड़ोसी इंजीनियरिंग छात्र को 20 साल की कैद
 

भोपाल के साकेत नगर निवासी रेप के आरोपी कौशल शर्मा को आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। उसके साथ पड़ोसी इंजीनियरिंग छात्र है, जिसे 20 साल की सजा सुनाई गई है।

जज कुमुदिनी पटेल ने पीएस स्‍कूल शिक्षा को भेजी फैसले की कॉपी, बोलीं- इसे नजीर की तरह पेश कर छात्रों में जागरूकता फैलाएं
फूफा को तीन अलग-अलग धाराओं में आजीवन कारावास, एक आरोपी के नाबालिग होने से मामला जुवेनाइल कोर्ट में विचाराधीन

राजधानी की जिला अदालत ने अपनी नाबालिग भतीजी से रेप करने वाले सगे फूफा कौशल शर्मा को तीन बार आजीवन कारावास और आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (पाक्‍सो) कुमुदनी पटेल ने रेप के मामले में आरोपी आरोपी पड़ोसी युवक इंजीनियरिंग के छात्र राहुल कुमार को 20 साल की जेल की सजा सुनाई है। इस मामले के तीसरे आरोपी के नाबालिग होने की वजह से उसका मामला किशोर न्यायालय में विचाराधीन है। जज कुमुदिनी पटेल ने फैसले की कॉपी प्रमुख सचिव स्‍कूल शिक्षा को फैसले की कॉपी भेजी। उन्होंने कहा कि स्कूलों में इस फैसले को नजीर की तरह पेश कर छात्रों में जागरूकता फैलाएं।

पुलिस के मुताबिक नाबालिग बच्ची से ज्यादती कर रहे फूफा को देखकर पड़ोसी इंजीनियरिंग के छात्र ने भी उसे अपनी हवस का शिकार बनाया था। जब बच्ची ने दोनों की करतूत पड़ोस में रहने वाले एक नाबालिग भैया को बताई तो उसने भी बच्ची के साथ ज्यादती की थी। शासन की ओर से पैरवी करने वाले विशेष लोक अभियोजक टीपी गौतम एवं राज्‍य समन्वयक (महिला अपराधों संबंधी) मनीषा पटेल ने अदालत में दलील दी कि वर्तमान सरकार बच्‍चों एवं महिलाओं के विरूद्ध हो रहे अपराधों के प्रति काफी सख्‍त है।

आरोपियों ने एक 9 साल की बालिका के साथ लगातार एक साल तक शारीरिक शोषण कर घिनौना अपराध किया गया है। आरोपी फूफा कौशल शर्मा जो बच्‍ची का संरक्षक भी था रिश्‍ते को कलंकित करते हुए ऐसी घटना को अंजाम दिया है, जो सभ्य समाज को स्‍वीकार नही है। सरकारी वकीलों ने अदालत से मांग की कि आरोपियों को उनके द्वारा किए गए कृत्य को ध्यान में रखते हुए कठोर दंड से दंडित किया जाना उचित होगा।

जज कुमुदिनी पटेल की गंभीर टिप्पणी- ताकि फिर से न हो ऐसी घटना

न्यायाधीश कुमुदनी पटेल ने प्रकरण में 19 वर्षीय अभियुक्त राहुल कुमार जो प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज का अंतिम वर्ष का छात्र था। उसे 20 साल जेल की सजा सुनाते हुए लिखा है कि इस केस में फैसला देश की भावी पीढी को भी संज्ञान लेना चाहिए ताकि फिर से ऐसी घटनाएं न घटे।

न्यायाधीश ने फैसले की प्रति स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को भेजी

न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल ने निर्णय की कॉपी प्रमुख सचिव- स्‍कूल शिक्षा विभाग, प्रमुख सचिव- उच्च‍ शिक्षा विभाग, प्रमुख सचिव-तकनीकी व कौशल विभाग को इस निर्देश के साथ भेजी है कि छात्रों को अवगत कराएं कि ज्यादती की परिभाषा में संशोधन कर कठोर दंड आदेश का प्रावधान किए गए है, जो कि उनके पूरे जीवन को नष्ट कर सकती है।

दहला देने वाली घटना साकेत नगर की

राज्‍य समन्वयक मनीषा पटेल ने बताया गया कि 22 मई 2018 को चाइल्ड लाइन को टोल फ्री नं 1098 अपराध की सूचना हुई थी। साकेत नगर में एक बच्‍ची के साथ उसके फूफा और पडोस में रहने वाले दो लड़कों द्वारा गलत काम किया जा रहा है। तब चाइल्ड लाइन में कार्य करने वाली मधु बौद्ध थाना बागसेवनिया आकर पुलिस वालों के साथ बच्‍ची के घर पहुंची, जहां पूछताछ पर फरियादी बच्ची ने बताया कि उसके माता पिता की मृत्‍यु के पश्चात वह अपने सगे फूफा कौशल शर्मा के यहां रहने आई थी। जब वह 9 साल की थी, तब एक दिन उसका फूफा कौशल शर्मा उसके पास आया और उसका मुंह दबाकर उसके सारे कपड़े उतारकर उसके साथ गलत काम किया।

इसी बीच एक दिन जब फूफा गलत काम कर रहा था तब पडोस का रहने वाला राहुल कुमार ने देख लिया और वह भी अभियुक्ति को अपने कमरे में ले जाकर उसके साथ ज्यादती करने लगा जब फरियादी बच्ची ने उक्‍त घटना की बात पड़ोस में रहने वाली एक भइया को घटना बताई तो उसने भी उसके साथ गलत काम किया। आखिर में पड़ोस की श्रेया दीदी को पूरी घटना बताई। जिन्‍होंने चाइल्‍ड हेल्‍प लाईन में फोन किया था उक्‍त सूचना पर थाना बागसेवनिया ने आरोपी फूफा कौशल शर्मा एवं राहुल के विरूद्ध भादवि की धारा 376-क ख, 376(ग) (3), 376 (एन) एवं धारा 5 एलएन, धारा 6 पाक्‍सो एक्‍ट के तहत मामला पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

इसी बीच जिला दंडाधिकारी ने अपराध को जघन्‍य एवं सनसनीखेज अपराध की श्रेणी में रखा। इसके बाद आरोपीगणों को डीएनए कराया गया, जिसमें आरोपी फूफा का डीएनए पीड़िता के कपड़ों में से मैच हुआ था। अभियोग पत्र विशेष कोर्ट (पाक्‍सो) में पेश किया गया था। एक अन्‍य आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसके विरूद्ध मामला पंजीबद्ध कर जुवेनाइल कोर्ट ( बाल न्यायालय) में प्रस्‍तुत किया गया था।