कोरोना वैक्सीन अगले साल तक भारत में आ जाने की उम्मीद है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती टीकाकरण को लेकर है। वैक्सीन सुरक्षा पर बनी विश्व स्वास्थ्य संगठन की ग्लोबल एडवायजरी कमेटी की सदस्य गगनदीप कांग ने मंगलवार को कहा कि देश के 1.3 अरब से ज्यादा लोगों तक सुरक्षित वैक्सीन पहुंचा पाना बड़ी उपलब्धि होगी। क्योंकि हमारे पर तमाम तरह की सुविधाओं व अनुभव की कमी है।

वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में माइक्रोबायोलॉजी की प्रोफेसर कांग ने ब्लूमबर्ग के साथ बातचीत में कहा-हमने महिलाओं-बच्चों को टीके लगाए पर वयस्कों के टीकाकरण का अभी अनुभव नहीं है। बुजुर्गों का टीकाकरण करने के लिए भी हमारे पास कोई आधारभूत संरचना नहीं है जबकि बुजुर्ग ही सबसे ज्यादा जोखिम में हैं, इसलिए इस पर जल्दी काम करना पड़ेगा। सभी उम्र के लोगों के लिए अलग-अलग इंतजाम कैसे किया जाएगा, यह बड़ी चुनौती होगी। प्रोफेसर जुलाई तक उस उस भारतीय टीम का भी हिस्सा थीं जो वैक्सीन पर नजर रख रही थी।

अगले साल तक वैक्सीन संभव
गगनदीप ने बताया कि फिलहाल दुनियाभर में जिन वैक्सीन का परीक्षण आखिरी दौर में चल रहा है, उनके सफल होने का चांस 50-50 फीसदी है। इस साल के आखिर तक हमें डेटा मिल जाएगा, जिससे पता चलेगा कि कौन सी वैक्सीन असरदार हैं और कौन सी काम नहीं कर रहीं। अगर नतीजे अच्छे मिले तो 2021 की पहली छमाही तक हमें वैक्सीन मिलनी शुरू हो जाएगी। हालांकि, शुरुआत में डोज कम होंगी लेकिन दूसरी छमाही में बड़ी संख्या में वैक्सीन तैयार होने लगेंगी।

टीकाकरण में क्या-क्या चुनौतियां:

भंडारण-वितरण: वैक्सीन का सुरक्षित भंडारण एवं वितरण एक बड़ी समस्या होगी क्योंकि सिर्फ किसी खास इलाके में नहीं बल्कि पूरे देश में वैक्सीन की जरूरत है। इसके लिए काफी संख्या में प्रशिक्षित लोग चाहिए।

व्यवस्था की कमी: डॉ. कुलदीप कांग के मुताबिक, हमारे पर हर आयुवर्ग के लोगों के टीकाकरण का अनुभव नहीं है। सुविधाओं की भारी कमी भी इसके आड़े आएगी, इसके लिए हमें अभी से तैयारी करनी होगी।

कम तापमान: फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अभी बन रही ज्यादातर वैक्सीन को -70 डिग्री सेल्सियस पर रखना जरूरी है जबकि भारत में ज्यादातर कोल्ड चेन -30 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान पर ही कार्यरत। सिर्फ जिनोवा बायोफार्मा के पास ही -70 डिग्री के तापमान पर स्टोर करने की क्षमता है।

टेस्ट पर सवाल: भारत ज्यादातर एंटीजन टेस्ट हो रहे जो 50 फीसदी तक झूठे भी हो सकते हैं। इस लिहाज से हमारे पर सही डाटा नहीं होगा जो बाधा पैदा करेगा। 

संक्रमण की दर: देश में अभी भी आठ फीसदी की पॉजीटिविटी दर, संक्रमण में लगातार कोई कमी देखने को नहीं मिल रही, इससे मरीजों की संख्या बढ़नी तय है।

टीकाकरण के लिए अभी से तैयारी शुरू
सरकार ने टीकाकरण की अभी से तैयारी शुरू कर दी है। टीकाकरण कार्यक्रम से जुड़े लोगों को भी सतर्क कर दिया गया है। भारतीय कोल्ड चेन ऑपरेटर टीकों की सुगम डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए एक कुशल लॉजिस्टिक नेटवर्क तैयार करने में जुट गए हैं। इससे जुड़े अधिकारियों ने बताया कि देश में उपलब्ध सभी कोल्ड चेन व वेयरहाउस को इसमें शामिल किया जाएगा और यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (यूआईपी) के तहत एक साथ एक बड़े हिस्से को टीका उपलब्ध कराया जाएगा।

स्नोमैन लॉजिस्टिक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील नायर ने एक साक्षात्कार में बताया कि हमारे पास पर्याप्त क्षमता उपलब्ध नहीं है। इसलिए, प्रत्येक शहर में ऐसी कंपनियों की तलाश करनी होगी, इनमें तमाम निजी कंपनियां भी शामिल होंगी, जिनके पास कोल्ड स्टोरेज की सुविधा है और जो वितरण का ख्याल रख सकते हैं। बता दें कि स्नोनैन लॉजिस्टिक्स भारत का सबसे बड़ा कोल्ड चेन नेटवर्क है।

भारत में वैक्सीन की तैयारी

1. सीरम इंस्टिट्यूट ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन का आखिरी चरण का परीक्षण कर रहा है। यह भी अंतिम दौर में है

2. डॉ. रेड्डी लैबोरेटरीज रूस की वैक्सीन स्पूतनिक का भारत में वितरण की तैयारी कर चुका है, अनुमति मिलते ही वितरण होगा

3. भारत में बन रही 'भारत बायोटेक' कंपनी की वैक्सीन 'कोवैक्सीन' परीक्षण के दूसरे चरण में है, नतीजे काफी उत्साहजनक

4. भारतीय कंपनी जायडस कैडिला की वैक्सीन 'जेवाईसीओवी-डी' का तीसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल करने के लिए अनुमति के इंतजार में