देहरादून। उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार संकट में पड़ गई है। मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ नौ विधायकों ने शुक्रवार को बगावत कर दी। बागियों की अगुआई कर रहे वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया।

इस बीच शनिवार सुबह उत्‍तराखंड के मुखमंत्री हरीश रावत, संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदेश और विधानसभा अध्‍यक्ष जीएस कुंजवाल के बीच बैठक चल रही है। इस बैठक के बाद वे उत्‍तराखंड के राज्‍यपाल केके पॉल से मुलाकात करेंगे।

उधर, विद्रोही कांग्रेसी नेता कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने कहा कि उन्‍होंने कल ही राज्‍यपाल को बता दिया था कि हमें स्‍पीकर पर कोई विश्‍वास नहीं है। पूर्व मुख्‍यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि हरीश रावत को खुद की सत्‍ता छोड़ देनी चाहिए या इस्‍तीफा दे देना चाहिए या उन्‍हें हटा दिया जाएगा।

राज्य भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि राज्य की मौजूदा सरकार अल्पमत में आ चुकी है। रावत सरकार को नैतिक तौर पर सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं है। उनका कहना था कि यदि रावत सरकार बर्खास्त नहीं की जाती है तो वह इसके लिए राष्ट्रपति का दरवाजा खटखटाएंगे।

दिल्ली पहुंचे विधायक, होटल में ठहराए गए

इस बीच कांग्रेस के सभी नौ बागी विधायक भाजपा के 26 विधायकों के साथ दिल्ली पहुंच गए हैं। इन सभी को एक चार्टेड प्लेन से दिल्ली लाया गया है। इन सभी विधायकों को गुड़गांव के एक होटल में ठहराया गया है। यह सभी विधायक आज किसी भी समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात करेंगे। इनके साथ भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राज्य के पूर्व सीएम निशंक और राज्य भाजपा के अध्यक्ष सोम जाजू भी मौजूद हैं।

दिल्ली पहुंचने पर राज्य के पूर्व सीएम विजय बहुगुणा ने हरीश रावत पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। वहीं कांग्रेस के बागी विधायक हरक सिंह रावत ने कहा कि हरीश रावत की सरकार गिरने के बाद राज्य में एक बेहतर सरकार बन सकेगी। हालांकि कांग्रेस नेता हिमेश खरकवाल ने कहा कि कांग्रेस सरकार के पास पूर्ण बहुमत है और रावत सरकार पूरी तरह सुरक्षित है। दूसरी ओर राज्य के सीएम ने भाजपा पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया है।

इससे पूर्व देर रात भाजपा विधायकों ने कांग्रेस के बागी विधायकों के साथ सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए राज्यपाल केके पॉल से मुलाकात की। उन्होंने कांग्रेस सरकार की बर्खास्तगी की मांग की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के मुताबिक राज्यपाल के समक्ष 35 विधायकों की परेड कराई गई। इस दौरान भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय, दो पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी व रमेश पोखरियाल निशंक भी मौजूद थे। इसके बाद केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री महेश शर्मा के साथ सभी 35 विधायक दिल्ली रवाना हो गए।

दिनभर चला सियासी घमासान

इससे पहले राजधानी देहरादून में दिनभर के सियासी ड्रामे के बाद देर शाम विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ। विनियोग विधेयक पर मत विभाजन के दौरान हरीश रावत कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के नेतृत्व में सत्तापक्ष के कुल नौ विधायक बगावत का बिगुल फूंकते हुए विपक्षी खेमे में आ गए। इस बीच स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने विनियोग विधेयक ध्वनिमत से पारित करने की घोषणा करते हुए कार्यवाही 28 मार्च तक स्थगित कर दी। इस पर विपक्षी विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया। मंत्रियों व विधायकों के बीच जमकर हाथापाई हुई। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने सचिव विधानसभा जगदीश चंद से सदन में मतदान के वक्त 68 विधायकों की उपस्थिति लिखित में देने की मांग की, मगर सचिव ने लिखित देने से इन्कार कर दिया। बाद में सदन से बाहर आकर कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने मंत्रिमंडल से इस्तीफे की घोषणा कर दी।

पहले ही लिख दी थी पटकथा

इस सियासी भूचाल की पटकथा बजट सत्र प्रारंभ होने से पहले ही लिख दी गई थी। सरकार के अंदर उठे बगावती सुरों ने इसे चार-पांच दिन में क्लाइमेक्स तक पहुंचा दिया। बगावत व अस्थिरता के इस घटनाक्रम में बीते रोज तब राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया, जब भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय व प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू समेत कुछ अन्य नेता देहरादून पहुंचे। केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी में भाजपा के विधायकों की एक होटल में गुरुवार को देर रात तक बैठक चलती रही। शुक्रवार सुबह सदन की कार्यवाही प्रारंभ हुई, तो सत्ता के गलियारों में बगावत व कांग्रेस सरकार की अस्थिरता की आशंका भी चढ़ते सूरज की रफ्तार से बलवती होती रही।

तैयारी में विपक्ष भारी पड़ा

सुबह से विधानसभा में कांग्रेस व भाजपा नेताओं की गहमागहमी रही। इन आशंकाओं से परेशान मुख्यमंत्री हरीश रावत व उनके करीबी सिपहसालार दिनभर सियासी आपदा प्रबंधन की कोशिश में जुटे रहे। मुख्यमंत्री सत्तापक्ष के सभी विधायकों से अलग-अलग बातचीत करते रहे। लेकिन बगावत थामने में सफलता नहीं मिल सकी। वहीं विपक्षी विधायक पिछले कई दिनों की तरह शुक्रवार को भी सदन के भीतर व बाहर एकजुट दिखे। देर शाम सदन में विनियोग विधेयक पेश होते ही विपक्ष ने इस पर मत विभाजन की मांग उठा दी। इसी दौरान सदन में कांग्रेस के 36, भाजपा के 26 व पीडीएफ कोटे के सभी छह विधायक मौजूद थे। रावत सरकार के वरिष्ठ मंत्री हरक सिंह रावत समेत सत्तापक्ष के नौ विधायक विपक्ष के पाले में खड़े हो गए।

विस अध्यक्ष के फैसले का विरोध

विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने विनियोग विधेयक पर मतदान के बजाय ध्वनिमत से पारित होने की घोषणा की। इसके बाद वह कार्यवाही स्थगित कर सदन से चले गए। इस पर विपक्षी विधायक वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। कुछ टेबल पर जा चढ़े। कई मंत्री व विधायकों के बीच जमकर धक्कामुक्की हुई। सदन के बाहर आते ही बागी कांग्रेसी विधायकों ने भी हरीश रावत के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी, तो भाजपा विधायक भी मुख्यमंत्री हरीश रावत व उनकी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। उधर, हरीश रावत खेमा उनके समर्थन में नारे लगा रहा था।

ये हैं नौ बागी विधायक

हरक सिंह रावत के मुताबिक उनके साथ बगावत करने वाले कांग्रेसी विधायकों में विजय बहुगुणा, शैलारानी रावत, कुंवर प्रणव चैंपियन, प्रदीप बत्रा, अमृता रावत, सुबोध उनियाल, शैलेंद्र मोहन सिंघल और उमेश शर्मा हैं।

विधानसभा का राजनीतिक समीकरण

गौरतलब है कि उत्तराखंड में विधानसभा की कुल 70 सीटें हैं, एक सीट नामित हैं और उसे जोड़ कर सीटों की संख्या 71 पहुंच जाती है। कांग्रेस के पास बहुमत से एक सीट ज्यादा 36 सीटें हैं। बीजेपी के पास 28 सीटें हैं तो बीएसपी की झोली में 2 सीटें गई थीं। अन्य के खाते में 4 सीटें हैं।

मत विभाजन के दौरान सदन में विनियोग विधेयक पारित नहीं हो पाया। लिहाजा, हरीश रावत के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई। सरकार में माफिया तंत्र हावी था। मैंने इसके बाद मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। - डॉ. हरक सिंह रावत, कांग्रेस के बागी गुट के नेता

जब तक मैं पीठ पर बैठा था, तब तक सत्तापक्ष के सभी विधायक साथ थे और कोरम पूरा था। मेरे पीठ पर रहने तक कोई ऐसी कोई बात नहीं आई। विभागीय बजट पहले भी ध्वनिमत से पारित होते रहे हैं। आज भी ध्वनिमत से पारित हो गया। - गोविंद सिंह कुंजवाल, विधानसभा अध्यक्ष, उत्तराखंड