सपाक्स पार्टी के बढ़ते जनाधार से भाजपा और कांग्रेस को हो सकता है भारी नुकसान

 
छतरपुर। मप्र में अभी तक भाजपा और कांग्रेस पार्टी ने शासन किया और आम जनता की भावना को दरकिनार करते हुए आरक्षण को जाति के आधार पर लागू किया। पहले कांग्रेस ने आरक्षण को 10 साल के लिए लागू किया था परंतु उसके बाद कांग्रेस पार्टी आरक्षण को लगातार बढ़ाती रही। इसके बाद अभी हाल ही में 15 साल से भाजपा का शासन चलता रहा और भाजपा के कर्णधार नेता एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुलेआम चुनौती कि कोई भी माई का लाल आरक्षण को खत्म नहीं कर सकता और न ही पदोन्नति में आरक्षण को खत्म कर सकता है। ऐसे कई बयान देकर अन्य जाति के मतदाताओं को ललकारा। जिसके खिलाफ एक विशेष आंदोलन पूरे देश में हुआ। खासतौर से मप्र में। एट्रोसिटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट ने एक रास्ता निकाला था कि जांच होने के बाद इसमें गिरफ्तारी की जाए परंतु भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्तमान देश के प्रधानमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट से आदेश को दरकिनार कर लोकसभा एवं विधानसभा में अध्यादेश लाकर पुन: एट्रोसिटी एक्ट को यथावत कर दिया। जिससे पूरे देश में भाजपा के खिलाफ आंदोलन शुरु हो गया। मजेदार बात ये है कि इस अध्यादेश में कांग्रेस पार्टी के सांसदों ने भी समर्थन किया और देश को बता दिया कि सवर्ण जाति के लोगों को यह एक्ट भुगतना पड़ेगा। इसी एक्ट के विरोध में प्रदेश में सपाक्स पार्टी का उदय हुआ और सवर्ण समाज, राजपूत कर्णी सेना जैसी सभी अन्य पार्टियां एकजुट हुईं और सभी ने सपाक्स पार्टी को समर्थन देकर एक नई पार्टी बनाई। इस पार्टी के बनने से अब प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा दोनों घबराई हुई हैं। जिसके चलते प्रदेश में सपाक्स पार्टी के जहां जहां उम्मीदवार खड़े हुए हैं वहां दोनों पार्टियों को काफी नुकसान होने की संभावना है। फिलहाल छतरपुर जिले से पांच विधानसभा सीटों पर सपाक्स पार्टी ने अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। छतरपुर विधानसभा से अग्रवाल विनोद के खड़े होने से छतरपुर सीट का समीकरण दोनों पार्टियों के लिए बिगड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि प्रदेश में सरकार के खिलाफ माहौल बना हुआ है और इसका फायदा कांग्रेस के प्रत्याशियों को काफी हद तक मिल रहा है।