*थाना ओरछा रोड पुलिस का रेत माफियाओं से तगड़ा गठजोड़, 1 हजार रुपये प्रीति ट्रैक्टर वसूली के लगे गंभीर आरोप*

*रात के अंधेरे में रेत का कालाकरोबार

*शिकायत के बाद डीआईजी ने दिए जांच के आदेश*

छतरपुर। शहर का ओरछा रोड थाना हमेशा से शहर में चर्चा का केन्द्र बना रहता है। यहां पर तैनात पुलिस की शर्मनाक कार्य प्रणाली के चलते थाना क्षेत्र की जनता तो त्रस्त रहती ही है, साथ ही पुलिस के आला अफसरों की छबि धूमिल बनी रहती है। शहर के पत्रकार भूपेन्द्र सिंह ने अपने एक दर्जन साथियों के साथ डीआईजी छतरपुर को एक लिखित पत्र सौंप कर ओरछा रोड टीआई प्रकाश गढ़रिया पर कार्यवाही करने की मांग की है। डीआईजी ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए जांच करने के निर्देश जारी किए है।  

*यह है पूरा मामला-*

पत्रकार भूपेन्द्र सिंह ने पत्र के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया है कि वह बुधवार की रात नौगांव से पत्रकार अखिलेश पटेरिया के भाई की शादी-समारोह से लौटकर वापिस छतरपुर की ओर अपने साथी मनीष खरे, लक्ष्मी नारायण शर्मा, राजेन्द्र रैकवार, आशीष उपाध्याय के साथ निजी वाहन से घर रहे थे, तभी रास्ते में मऊहाानियां के पास अबैध रेत से भरे दो दर्जन से अधिक ट्रैक्टरों का काफिला गुजर रहा था। कार चालक ने हॉर्न डिफर के माध्यम से साइड लेना चाही, परंतु तेज गति से अबैध रेत से भरे दौड़ रहें ट्रैक्टरो ने कार को साइड नहीं दी। काफी देर तक पीछे लगे रहने के बाद कार चालक ने जगह देखकर अपने वाहन को आगे निकालने की कोशिश की तो ट्रैक्टर के ड्राइवर ने चालाकी से कट मार दिया। जिससे कार रोड के किनारे गयी और कार चालक की बड़ी सूझ-बूझ से होने वाली दुर्घटना टल गयी। घटना की जानकारी दूरभाष के माध्यम से तुरंत जिला कंट्रोल रूम को दी गयी एवं ओरछा रोड थाना प्रभारी प्रकाश गढ़रिया को अबैध रेत परिवहन की जानकारी दी। थाना प्रभारी ने थाना क्षेत्र में होने का हवाला देकर पुलिस को भेजने की बात कही। घटना के एक घंटा गुजर जाने के बाद भी पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। पुलिस के पहुंचने से ट्रैक्टर चालक ओरछा रोड थाने के सामने से शहर में प्रवेश कर गये। 

*पुलिस और अबैध रेत माफियाओं की तगड़ी सेंटिग-*

मीडिया के विश्वनीय सूत्रों से जो जानकारी प्राप्त हुई वह बहुत ही चौकाने वाली है। बताया जा रहा है कि नौगांव के क्षेत्र और आलीपुरा, गरौली की धसान नदी से रोजाना एक सैकड़ा से अधिक ओवर लोड अबैध रेत से भरे हुए ट्रैक्टर छतरपुर रेत सप्लाई करने के लिए निकलते है। ट्रैक्टर निकासी के एवज में रेत माफियाओं के द्वारा पुलिस थाना एवं चौकी में 1 हजार रुपये प्रति ट्रैक्टर देने पड़ते हैं। जिससे पुलिस स्वयं रेत माफियाओं की सहायक बनी हुई है। बाजार में प्रति ट्रैक्टर रेत 12 से 15 हजार रुपये में बेचा जा रहा है। जिससे से रेत माफिया को इस काले कारोबार में भारी फायदा बना हुआ है। जिस कारण बड़े व्यापक पैमाने पर रेत का काला कारोबार किया जा रहा है।

 

राजेन्द्र कुमार रैकवार 
दबंग मीडिया
व्यूरोचीफ

Source ¦¦ DM news