सदर विधायक 
 आलोक चतुर्वेदी पज्जन   हालात बदलना चाहते हैं - लेकिन उनकी कांग्रेस सरकार होने के बावजूद चल नहीं पा रही है । आप दिल से फिक्रमंद होने के बावजूद विधायक जी क्या करेंगे? सारा सिस्टम ही सड़ गया है और भ्रष्टाचार की सड़ांध ने रियाया का जीना मुहाल कर दिया है और न्याय से वंचित कर दिया है । 
#आप जिला अस्पताल के हालात बदलने चले थे, पर कुछ नहीं बदला । मरीज और उसका परिजन परेशान है, कोई उनकी सुनने वाला नहीं । बिल्डिंग भर बदली है, डाक्टरो का रवैया नहीं । दलालों की पौ बारह है । हर डाक्टर के व्यक्तिगत अस्पताल व क्लीनिक है - वह अस्पताल में कम अपने यहाँ मरीज को देखने में ज्यादा कमाई करता है । करे भी क्यों न? डाक्टरी की मंहगी पढ़ाई के बाद तबादला वगैरा में ऊपर तक पैसा जाता है । सीएस पाण्डेय को तो सुधारना ही नहीं है और सीएमएचओ बाजपेयी हालात सुधारने के पक्ष में नही है । 
# आपने बिजली विभाग का भर्रा देखा और उपभोक्ता को परेशान होते हुए भी । एक ही बहाना है कि अमला ही नहीं है । आपकी हड़क एक कान से सुन दूसरे कान से निकाल दी गई होगी । एक बात और विधायक बनने के बाद शायद! आपका बिजली बिल कम आने लगा होगा । लेकिन आम आदमी परेशान है । सही खपत की जगह दो सौगुना बढ़ाकर बिजली के दिये जाते है और कम करने के पैसे लिये जाते है - कोई सुननहार नहीं ।
#आपने पुलिस को वाहनों से अवैध वसूली करते देखा, खूब हड़का भी । वीडियो वायरल हुआ, आप खुश हुए होंगे । लेकिन हालात बदलना नामुमकिन है । क्योंकि बेचारे पुलिस वालों बहुत बेगार करने पड़ते हैं । हर आला अफसरान के घर गृहस्थी का पूरा खर्चा उठाना पड़ता है - दूध, किराने से लेकर नमक तक । 
#ठीक है, विधायक जी आपके उर में हालात सुधारने और बदलने की जनहित में आग जल रही है । लेकिन कोई बदलने को तैयार नहीं है । घाटे का सौदा किसे पसंद है? अब आप भगवान भी नहीं कि हर जगह पहुंच कर जादू कर देंगे या किसी दोषी को शाप दे देंगे । लेकिन आप अलख जगाये रहे, शायद! कुछ बदले । बस, हतोत्साहित न हो जाइयेगा ।
#बेहतर हो कि कनफुंकिया नहीं, समर्पित और ईमानदार कार्यकर्ताओ की एक सशक्त टीम बनायें और हर विभाग की पैनी निगहबानी और जिम्मेदारी अलग - अलग सौंप दे और आप भी पैनी नजर बनाये रखें ।
#जय_हो, #वक्त_है_बदलाव_का

लेख साभार- वरिष्ठ पत्रकार श्रवण कुमार की फेसबुक वॉल से