रेत खदानों के व्यावसायिक लाइसेंसों की गुपचुप बिक्री शुरू*

भाजपा नेताओं ने लगाए जिला प्रशासन और कांग्रेस नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप

सत्यनिधि त्रिपाठी (संजू)

छतरपुर। 15 साल मप्र में सत्ता पर काबिज रही भाजपा सरकार के जाते ही कांग्रेस सरकार बनते ही कांग्रेस के नेताओं ने रेत खदानों पर अपनी रुचि दिखाना शुरु कर दी ।  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नए कलेक्टर मोहित बुंदस पर दबाव बनाकर लगभग 12 रेत खदानों की व्यापारिक स्वीकृति प्रदान करा दी। जिसके चलते पूरे क्षेत्र में ग्राम पंचायत को दी गई स्वीकृति का लाभ अब रेत माफिया उठाएंगे। उप्र के रेत माफियों ने नई रणनीति के तहत ग्राम पंचायतों से अनुबंध कर कलेक्टर से बकायदा रेत की व्यापारिक लायसेंस की स्वीकृति लेकर कारोबार शुरु कर दिया है। इस कारोबार में कांग्रेस के नेताओं का पूरा संरक्षण है। यह आरोप भाजपा के विधायक राजेश प्रजापति ने लगाया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार व्यापारिक लायसेंस की स्वीकृति करने के लिए कलेक्टर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव तक का दबाव था। जिसके चलते कलेक्टर मोहित बुंदस ने आनन फानन में एक ही दिन में पांच से सात फाइलें करके मुख्यमंत्री को इससे अवगत कराया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन रेत खदानों के स्वीकृत होने पर पूरे जिले में हडकंप मचा हुआ है और उप्र के रेत माफिया छतरपुर जिले में पूरी तरह अपने पैर पसार चुके हैं। आज स्थिति यह है कि पंचायतों को जो खदानें स्वीकृत की गई थीं उन खदानों पर बाहुबलि और बड़े बड़े रेत माफियों का अब कब्जा हो गया है। वह मनमाने तरीके से रेत का अवैध उत्खनन कर ओवर लोडिंग कर परिवहन कर मप्र की रेत का दोहन कर रहे हैं। जिससे शासन को मिलने वाली करोड़ों रुपए की रॉयल्टी की खुलेआम चोरी की जा रही है। हालांकि इस संबंध में खनिज विभाग से कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। कलेक्टर भी व्यापारिक लायसेंस की स्वीकृति के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर पा रहे और लगातार पत्रकारों को गुमराह कर रहे हैं। भाजपा के नेता इस मुद्दे को लेकर लोकसभा चुनाव में कूदेंगे। भाजपा के शासन काल में ऐसी स्वीकृतियां नहीं दी गई थीं। परंतु कांग्रेस सरकार के बनने के बाद रेत माफियों को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से यह व्यापारिक स्वीकृतियां दी गई हैं।