प्रशासन की अतिक्रमण विरोधी कार्यवाही को अदालत ने सही ठहराया

छतरपुर। राजस्व अधिकारियों ने शासकीय तालाब की जमीन में बने मकान को गिरा दिया था। जिसके खिलाफ पीडि़त पक्ष ने कोर्ट में मामला पेश किया। तालाब की जमीन में मकान का निर्माण करना अवैध मानते हुए मामला खारिज कर दिया।

एडवोकेट लखन राजपूत ने बताया कि छतरपुर निवासी वादीगण अशोक सोनीए कंछेदी सोनी और मुन्नालाल सोनी पुत्रगण हल्काई सोनी ने कोर्ट में मामला पेश किया था कि मप्र राज्य की स्थापना के पहले छतरपुर रियासत के शासन काल में 1944 के पहले छतरपुर के महाराजा विश्वनाथ सिंह का शासन था। 1944 के पहले वादीगण अशोक बगैरह के परदादा नोरे सुनार का मकान 1620 वर्गफिट संकट मोचन ग्वाल मगरा मोहल्ला में बना था। नोरे की मृत्यु के बाद उनके पुत्र कुन्नाई को उक्त मकान उत्तराधिकार में मिला। और कुन्नाई के बाद उनके पुत्र गोरेलालए हल्काई को उत्तराधिकार में मिला था। गोरेलाल और हल्काई ने मौखिक बटवारा 1959.60 में कर आधा.आधा मकान बांट लिया था। आधा मकान हल्काई के नाम नगरपालिका में दर्ज हुआ। हल्काई की मृत्यु के बाद मुन्नालाल सोनी के नाम मकान दर्ज हुआ। शासकीय अधिकारियो ने उक्त मकान 22 मई 2011 को जबरन तोड़ फोड़ कर गिरा दिया था। वादीगण अशोक बगैरह के पास छतरपुर जिला में कोई मकान नही है। इस लिए उक्त मकान के संबंध में उनके नाम स्वत्व घोषणा किए जाने और कब्जा वापिस दिलाए जाने का आदेश दिया जाए। अधीनस्थ अदालत अशोक बगैरह का मामला 31 अक्टूबर 2013 को खारिज कर दिया। जिसके खिलाफ अशोक बगैरह ने अपील पेश की। शासन ने कोर्ट में जवाब दिया कि उक्त विवादित मकान शासकीय ग्वाल मगरा तालाब की भूमि में अतिक्रमण कर बनाया गया था। राजस्व अधिकारियो ने भी 12 जुलाई 2006 को अशोक बगैरह को उक्त मकान से बेदखल करने का आदेश दिया है।

तालाब या सार्वजनिक स्थल पर नही कर सकते निर्माण, अदालत

शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता अरुणदेव खरे ने पैरवी करते हुए पक्ष रखा। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश आरएल शाक्य की अदालत ने फैसला दिया है कि तालाब या जल की जगह में कोई भी परिवर्तन करने की अनुमति यदि दी गई तो पारिस्थितिक और पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाएगा। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह पारिस्थितिक और पर्यावरण संतुलन को बनाकर रखे। उक्त विवादित मकान आबादी की भूमि के तहत नही आते है। और शासकीय ग्वाल मगरा तालाब को आबादी का क्षेत्र घोषित नही किया गया है। उक्त मकान तालाब की मेढ़ पर सार्वजनिक स्थल पर बना है। सार्वजनिक स्थल पर किसी भी व्यक्ति को निर्माण करने का अधिकार नही है। इस लिए वादीगण अशोक बगैरह उक्त मकान के संबंध में कोई भी स्वत्व या कब्जा प्राप्त करने के अधिकारी नही है और कोर्ट ने अपील खारिज कर दी। 

Source ¦¦ DM news