सभी धर्म, जाति, और वर्ग के 2 लाख लोग होते हैं शामिल

रामलला के लिए महाराजा भवानी सिंह जू देव ने विदेश से मंगवाया था रथ

नगर भम्रण में लगते हैं 8 से 9 घंटे, दर्शन के लिए उमड़ता है जनसैलाब, 5 सौ किलो का प्रसाद वितरण  

 

छतरपुर। अपने आराध्य की एक झलक पाने के लिए लोग सड़कों पर उतर आते है, शहर में जिस ओर देखो वहीं लोग हाथों में पूजा की थाली एवं फूल लेकर आगवानी के आतुर नजर आते हैं, इस दिन शहर में अघोषित अवकाश रहता है, सभी बड़े- छोटे प्रतिष्ठान व्यापारी एवं आमजन भव्य शोभायात्रा में शामिल होते है। यह नजारा नगर के सबसे बड़े आयोजन रामनवमीं पर भव्य शोभायात्रा के दौरान दिखाई देता है। हम आपको यह जानकारी सिर्फ इसलिए नही दे रहे हैं कि यह सबसे बड़ा आयोजन है, बल्कि यह कई मायनों में दूसरो आयोजनों से अलग और अद्भुत भी है, यह शोभायात्रा सामाजिक समरसता की मिसाल है, जिसका जगह-जगह शीतल पेय, मिठाई एवं स्वाल्पाहार स्वागत किया जाता है। इस शोभायात्रा के आयोजक श्रीराम सेवा समिति सदस्यों ने बताया कि इस शोभायात्रा के लिए हम सभी दो महीने पहले से तैयारयां शुरु कर देते हैं, जिसमें सभी लोग हर बार कुछ नया और बेहतर करने के लिए करने की कोशिश करते हैं। शोभायात्रा के लिए घर-घर पीले चावल देकर न्यौता दिया जा रहा है। इस आयोजन के लिए पूरे शहर को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। शोभायात्रा में सबसे आगे गणेश जी की प्रतिमा 51 धर्म ध्वज ,महापुरुषों की झाकियां एवं 51 घोड़े रहते हैं। जिनका जगह-जगह महाआरती से राम रथ का स्वागत होता है। इस बार का आयोजन भी सभी नगरवासियों के सहयोग से बहुत खास होगा।  

 राम जन्म से होती है शुरुआत

राम नवमीं के मौके पर भव्य शोभा की शुरुआत गल्ली मंडी स्थित रामलीला मैदान से की जाती है, इस रामलीला के मंचन में रामलला का जन्म किया जाता है। पौराणिक मान्यतानुसार श्रीराम का जन्म दोपहर 12 बजे हुआ था, इसलिए इसी समय शोभायात्रा का शुभारंभ किया जाता है। मानस भवन रामलीला मैदान से शरु होकर चौक बाजार, छत्रसाल चौराहा, आकाशवाणी तिराहा, बस स्टैंड  से होते हुए वापस गांधी चौक पर सजे राम दरबार मे समापन होता है। इस दौरान 8 से 9 घंटे का समय लगता है, जिसमें 4 से 5 सौ किलो प्रसाद का वितरण किया जाता है। 

  शोभायात्रा में सभी समाज की अद्भुत झांकियां

भव्य शोभायात्रा में सभी समाजों की झाकियां शामिल होती हैं, जिसमें सभी अपने इष्टदेव की प्रतिमाओं को रोचक तरीके से सजाते हैं, इस दौरान समाजिक बुराइयों एवं कुप्रथाओं को दूर करने के अलावा रक्तादान जैसे पुनीत कार्यों के लिए जागरुक करती प्रदर्शनी लगाई जाती हैं।   

 

- इंपोर्टेड रथ का हर बार नया स्वरुप

 

नगर के इस भव्य और सबसे विशाल आयोजन के लिए तैयारियां भी दो महीने पहले से बड़े पैमाने पर की जाती हैं। शोभायात्रा के लिए तत्कालीन तिलकधारी महाराजा भवानी सिंह जू देव ने चार पहिए का हाथ से खींचा जाने वाला रथ को विदेश से मंगवाया था, जिसे प्रतिवर्ष बड़े आकर्षक स्वरुप में सजाया जाता है। अनुमान के मुताबिक शोभायात्रा में 10 लाख का खर्च आता है। 

 रथ खींचने का पहला हक दलित को 

इस आयोजन की प्रथा पुरातन काल से चली आ रही है, इसमें रामजन्म के बाद रथ में राम दरबार को विराजमान करने के बाद रथ में पहला हाथ दलित का लगाया जाता है। इसके पीछे उद्देश्य है कि समाज में सभी बराबर है, यह आयोजन सबका है। शोभायात्रा को पहले विश्व हिंदु परिषद एवं बजरंग दल द्वारा निकाला जाता था, लेकिन वर्ष 2006 से श्रीराम सेवा समिति द्वारा किया जा रहा है। इस समिति का यह 14वां आयोजन है।  

- पीले चावल से घर-घर न्यौता

इस आयोजन में शामिल होने के लिए नगर और आसपास के गांवों में पीले चावल देकर आमंत्रित किया जाता है। मुख्य आयोजन से पहले नगर में कुछ दिन पहले से रोजाना सुबह प्रभात फेरी निकाली जाती है, जिसमें प्रतिदिन अलग-अलग मार्गों से लोगों  को शोभायात्रा में शामिल होने की अपील की जाती है। नगरवासी भी घरों में दीपक, द्वार पर रंगोली सजाकर स्वागत करते हैं।

Source ¦¦ DM news