सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नगर के तालाबों को अतिक्रमण से बचाने के लिए छतरपुर विधायक और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा
छतरपुर। शहर के तालाबों में वेतहासा हो रहे अतिक्रमण को रोकने एवं तालाबों को संरक्षित करने की मांग को लेकर नगर के सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा जिला कलेक्टर मोहित बुंदस एवं विधायक  आलोक चतुर्वेदी पज्जन चाचा को ज्ञापन दिया। ज्ञापन के माध्यम से अतिक्रमण हटाने,तालाबों की साफ-सफाई कराकर गंदे नालों को बंद कराने के साथ-साथ तालाबों का गहरीकरण कर संरक्षण व सौन्दर्यीकरण करने की मांग की गई है। ताकि शहर तालाबों का जलस्तर एवं सुन्दर पूर्व की भांति लौट व भविष्य में भी संकट का सामना न करना पड़े। 

सामाजिक कार्यकर्ता पं.सौरभ तिवारी ने बताया कि छतरपुर शहर के चारों ओर विभिन्न तालाब स्थित हैं जिनमें में संकट मोचन,ग्वालमगरा,किशोर सागर,प्रताप सागर, सांतरी तलैया, विन्ध्यवासनी तालाब,रानी तलैया आदि तालाब चन्देल कालीन समय के हैं जो कि शहर के जल स्तर को बनाये रखने के साथ-साथ नगर की सुन्दरता के द्योतक हैं लेकिन वर्तमान समय में शहर के लगभग सभी तालाबों में प्रशासनिक उपेक्षा के चलते अतिक्रमणकारियों द्वारा लगातार विभिन्न प्रकार से निरंतर अतिक्रमण किया जा रहा है। जिससे तालाब दिन प्रतिदिन सिकुड़ते जा रहे हैं एवं तालाबों में जलकुंभी,गंदे नालों एवं कचड़े का अंबार लगा हुआ है। 

अतिक्रमण हटाने,अतिक्रमणकारियों पर कार्यवाही करने का आदेश  माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया है लेकिन माननीय उच्च न्यायालय एवं एन.जी.टी. के आदेशों का पालन भी नहीं हो पा रहा है। पूर्व कार्यवाही हेतु नगर के विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा रैली निकालकर ज्ञापन दिये जा चुके हैं,कई बार सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वयं जाकर मोर्चा भी संभाला। जिसके कारण खुलेआम अतिक्रमण होना बंद हो जाता है। लेकिन दीर्घकालीक परिणाम बिना प्रशासन की सजगता के नहीं मिल सकता। 

सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप सेन ने बताया कि  गत वर्ष दिनांक 14 जून 2018 अतिक्रमण से मृतप्राय तालाबों की विधिवत अर्थी सजा कर मुण्डन कराया,फूट-फूट कर रोये और फिर शवयात्रा निकालकर रीति रिवाज के साथ छत्रसाल चौराहे पर अंतिम संस्कार किया। तत्पश्चात् सभी तालाबों में प्रतिदिन दिये रखे गये एवं 22 जून को इलाहाबाद में अस्थि विसर्जन एवं शोकसभा का आयोजन किया गया एवं 27 जून 2018 को गंगाजली पूजन,त्रयोदशी एवं प्रसाद वितरण का आयोजन सम्पन्न हुआ, जिसमें भारी संख्या में शहरवासियों ने हिस्सा लिया। जिसका एक वर्ष पूर्ण हो चुका है,यह अनूठा आयोजन सम्पूर्ण क्षेत्र में खासा जनचर्चा का विषय रहा। उक्त आयोजन के बाद कुछ समय तक अतिक्रमण रूका रहा। लेकिन अब पुन: वहीं स्थिति निर्मित होने लगी है। तालाबों का औपचारिक सीमांकन कराकर अतिक्रमणकारियों को नोटिस दिये जाते है लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाही नहीं हुई।

इस अवसर पर घनश्याम दास बिड़ला,राजेन्द्र अग्रवाल,विपिन अवस्थी,लखन राजपूत,राजेन्द्र शर्मा,अंचल जैन,अजय विन्दुआ,सुदीप पाण्डे,शशि असाटी,प्रखर भट्ट,राजीव दमेले,संदीप गुप्ता,अमित जैन,देवेन्द्र अनुरागी,अरूण तिवारी,पुष्पेन्द्र वर्मा,हेमराज वर्मा,अन्नू सेन, राघवेन्द्र कुशवाहा,संजय अवस्थी,संदीप यादव,कपिल सेठ,उदय राय,पप्पू चौबे,राकेश रूसिया, रवि नीखरा,राजू सेन, निक्की पाठक, प्रशीष नारायण चतुर्वेदी,अशोक चतुर्वेदी, लाला नौगरिया सहित बड़ी संख्या में जल एवुं पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे।