गरियाबंद जिले के विकासखंड मैनपुर के ग्राम अमलीपदर में श्रीमद्भगवद्गीता का आयोजन

गरियाबंद-श्री पाण्डे निवास में आयोजिय
 श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन 1 सितंबर से 9 सितंबर तक किया गया है, कथा व्यास पर पंडित  श्री त्रिभुवन महाराज जी ,श्री सिद्धिविनायक मंदिर फिंगेश्वर वाले है, कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ किया गया ,साथ ही कथा महात्मय व देव् आवाहन किया गया, कथा संगीतमय में होने की वजह से लोगों का जुड़ाव स्वतः हो जाता है, पंडित त्रिभुवन महाराज ने कहा कि यहां भूमि जगन्नाथ की भूमि  है ,यहां से भगवान जगन्नाथ के लिए भोग जाता है इसलिए इसे देवभोग भी कहा जाता है ,जितने बड़े तीर्थ है उनके आसपास के क्षेत्र भी तीर्थ की श्रेणी में माना गया है, इसी प्रकार हम सब का व्यवहार हो कि हम सब जगन्नाथ की भूमि में रहते हैं ,उन्होंने कहा कि प्रत्येक युग में एक धाम रहा है ,सतयुग में बद्रीनारायण, त्रेता में रामेश्वरम ,द्वापर में द्वारकाधीश, तथा कलयुग में जगन्नाथ धाम को कलयुग का नाम बताया गया है ,उन्होंने कहा कि आगामी मई माह में पूरी में कथा का आयोजन किया गया, उन्होंने आगे कहा कि भगवान ध्रुव को 7 साल की उम्र में दर्शन दिए, यह उनका संस्कार है मा ही बच्चों की प्रथम गुरु होती है ,वह बच्चों को जैसा बनाना चाहे बनेगा, ध्रुव की मां सुनीति ने उन्हें संस्कार के साथ शिक्षा दिया, इसी का प्रतिफल है कि ध्रुव को भगवान ने काफी कम उम्र में दर्शन दिया है, उन्होंने आगे कहा कि ध्यान, पूजा ,हेतु कम उम्र को भी उत्तम माना गया है ,क्योंकि जो जो हमारी उम्र बढ़ती है हम जिम्मेदारियों से जुड़ते जाते हैं ,और ईश्वर से जुड़ाव कम हो जाता है ,इसीलिए कम उम्र की भक्ति को उत्तम बताया है ,उन्होंने कहा कि धुव चरित्र से यह शिक्षा मिलती है कि ,सुसंस्कार बच्चे को महान बनाते हैं ,तथा सत्य है परेशान हो सकता है, किंतु पराजित नहीं हो सकता, उन्होंने श्री चरित्र की व्याख्या करते हुए कहा कि नारी के लिए पति ही परमेश्वर है ,और सती से बढ़कर आज तक कुछ नहीं हुआ है ,हमारे धर्म ग्रंथ महान नारियों से भरा पड़ा है ,उनका जीवन चरित्र अपने जीवन में उतार कर एक आदर्श नारी बने ,कथा का आयोजन अमलीपदर के श्री रामेश्वर पांडे, के परिवार के द्वारा किया गया है, इस प्रकार कथा का आयोजन क्षेत्र में काफी लंबे समय बाद हुआ है ,इसलिए नगर के अलावा आसपास के लोग भी कथा सुनने आ रहे हैं, तथा का समय दोपहर 1:00 से 5:00 तक रखा गया है ,प्रत्येक दिन उत्सव का भी आयोजन होता है, इसमें सभी लोग बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।

 

Source ¦¦ रिपोर्ट- प्रतीक बेहेरा