सुधरने का नाम नहीं ले जिला अस्पताल प्रबंधन,लापरवाही से आदिवासी युवक की मौत।

 

 

छतरपुर// जिला अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते एक आदिवासी युवक की जान चली गयी, जिससे पूरा परिवार बेसहारा हो गया, किशनगढ़ के 25 वर्षीय बसंत आदिवासी अपने पीछे बिकलांग माता-पिता 23 वर्षीय पत्नी गोरी बाई, 2 साल की बच्ची आशा व 4 माह के बेटे नारायण को रोता बिलखता छोड़ गए।

सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने बताया कि बर्तमान समय मे कोरोना संकट के चलते मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत बहुत कम है फिर भी जिला अस्पताल में अव्यबस्थाओं व मनमानी का आलम चरम पर है, गुरुवार की मध्यरात्रि में मृतक बसंत को अचानक पेट मे दर्द उठा, परिजनों ने  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र किशनगढ़ में भर्ती कराया जहां से उन्हें छतरपुर के लिए रिफर कर दिया गया। लाकडाउन में वाहन की कोई व्यवस्था न होने के कारण परिजनों ने शुक्रवार की सुबह सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर को घटना की जानकारी दी, अमित ने बताया कि उन्होंने अकस्मात चिकित्सा वाहन 108 को सुबह साढ़े पाँच बजे फोन किया तो उन्होंने सम्बंधित अस्पताल के डॉक्टर या नर्स से बात कराने को कहा, जिससे अमित भटनागर ने मृत के परिजनों को 108 डायल कर नर्स से बात कराने की बात कही, मृत के परिजनों ने जब किशनगढ़ स्वास्थ्य स्टाफ से 108 पर बात करने की बात कही तो उन्होंने अभी 108 डायल के व्यस्त होने की बात कह कर निजी वाहन से जाने का कह मामले को टाल दिया, किसी तरह परिजन मरीज को मोटरसाईकिल से सुबह 7 बजे  जिला चिकित्सालय ले आये, जहां बड़ी मुश्किल से परिजनों द्वारा कई बार गुहार लगाने के बाद, जिला अस्पताल में स्टाफ नर्स द्वारा बिना जांच व देखे बिना

मरीज को इंजेक्शन व बोतल चढ़ा दी गई जब परिजनों द्वारा नर्स से पेट देखने की बात की गई तो नर्स द्वारा डॉक्टर आकर देखेंगे, बात कह बात को टाल दिया गया, बोतल खत्म होने पर परिजन द्वारा कई बार गुहार लगाने पर खून उल्टा बोतल में चढ़ने लगा, तब जाकर नर्स आईं व बोलत निकली, कुछ देर बाद मरीज के मुँह से खून निकलने लगा, जिसकी जानकारी नर्स को दी गई नर्स द्वारा डॉक्टर आएंगे तब जांच होगी की बात फिर दोहरा दी गई। अस्पताल में साढ़े बारह तक भी कोई डॉक्टर नही आया न नर्सों ने कोई सुध ली मरीज की तबियत बिगड़ती देख परिजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिजवार लाये जहाँ बिना जांच किये देखे छतरपुर रिफर का लिख दिया, परिजनों ने मरीज को किशनगढ़ ले जाकर ईलाज करने का सोच, किशनगढ़ लाने लागे जहां दोपहर 3 बजे  मरीज ने देवरा के आगे हथिनी तोड़ के पास दम तोड़ दिया, घटना की सूचना मिलने पर पुलिस द्वारा शुक्रवार शाम को शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

 

लाकडाउन के कारण बेटे की शवयात्रा में शामिल न हो सके माता पिता - बसंत के माता पिता विकलांग होने के बाबजूत भी अति गरीबी के कारण छोटे व हल्के काम करने को गुजरात गए थे, जो लाकडाउन के कारण अपने बड़े बेटे के अंतिम संस्कार में शामिल न हो सके।

वहीं इस लापरवाही के कारण स्थानीय लोगों में जमकर आक्रोश है, कई लोगों ने स्वाथ्य विभाग की लापरवाही पर शोशल मीडिया पर जमकर आक्रोश व्यक्त किया है।

 

अमित भटनागर

सामाजिक व राजनैतिक कार्यकर्ता।