स्थगन आदेश के बावजूद गुरु स्वामी शिक्षा समिति के चुनाव कराने की तैयारी से मचा हड़कंप

 

मृतप्राय समितिbको जिंदा कर संपत्ति पर कब्जे की कोशिश का आरोप, कार्यवाहक कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप और जांच की मांग

 

छतरपुर। छतरपुर की गुरु स्वामी शिक्षा समिति एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। करोड़ों रुपये मूल्य की समिति की बहुमूल्य जमीन को लेकर कथित तौर पर नए सिरे से खेल शुरू होने के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि प्रशासन द्वारा निर्वाचन प्रक्रिया पर रोक लगाए जाने के बावजूद कुछ लोग दोबारा चुनाव कराने की तैयारी में जुट गए हैं, जिससे सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

समिति का अस्तित्व खत्म, फिर चुनाव किसका और क्यों?

 

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि समिति के अधिकांश मूल सदस्यों का वर्षों पहले निधन हो चुका है और वर्तमान में समिति लगभग निष्क्रिय हो चुकी है। इसके बावजूद कुछ कथित लोगों द्वारा चुनाव कराने की कवायद शुरू की जा रही है। आरोप है कि इसका उद्देश्य पन्ना नाका स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की बहुमूल्य जमीन पर नियंत्रण स्थापित करना है।

 

पहले भी प्रशासन ने लगाई थी रोक

 

यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी समिति के चुनाव कराने का प्रयास हुआ था, लेकिन वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्रवाल की शिकायत और प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर तत्कालीन प्रशासन ने पूरी निर्वाचन प्रक्रिया पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। तत्कालीन अपर कलेक्टर ने मामले को गंभीर मानते हुए मार्गदर्शन के लिए राज्य शासन को पत्र भी भेजा था। बताया जा रहा है कि उस पर अब तक अंतिम निर्णय प्राप्त नहीं हुआ है।

 

तथ्य छिपाकर अनुमति लेने का आरोप

 

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ लोगों ने पूर्व में संबंधित अधिकारियों के समक्ष वास्तविक स्थिति छिपाकर निर्वाचन के पक्ष में अभिमत प्राप्त करने का प्रयास किया था। जब पूरे मामले की जानकारी तत्कालीन कलेक्टर को हुई तो उन्होंने पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी। अब आरोप है कि नए आवेदन के जरिए फिर से उसी प्रक्रिया को शुरू कराने की कोशिश हो रही है।

 

कार्यवाहक कलेक्टर से बड़ी मांग

 

मामले को लेकर जागरूक नागरिकों ने कार्यवाहक कलेक्टर विनय द्विवेदी से मांग की है कि राज्य शासन से स्पष्ट निर्देश प्राप्त होने तक समिति के किसी भी निर्वाचन, पंजीयन या प्रशासनिक प्रक्रिया पर पूर्ण रोक कायम रखी जाए। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह भी स्पष्ट किया जाए कि आखिर किन परिस्थितियों में दोबारा निर्वाचन की पहल की जा रही है।

 

करोड़ों की संपत्ति पर प्रशासन की परीक्षा

 

गुरु स्वामी शिक्षा समिति की संपत्ति लंबे समय से शहर की सबसे मूल्यवान संपत्तियों में गिनी जाती है। ऐसे में अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह स्थगन आदेश का कड़ाई से पालन कराता है या फिर विवादित प्रक्रिया को आगे बढ़ने देता है।