साहित्यकारों और लोक कलाकारों की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ विमोचन, बुंदेली साहित्य की समृद्ध परंपरा पर हुई चर्चा

खजुराहो। प्रसिद्ध कवयित्री एवं साहित्यकार श्रीमती संतोष पटेरिया की नवीन कृति "मोपे रंग न डारो सावंरिया" का गरिमामय विमोचन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जिले के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बहादुर सिंह परमार, बुंदेली स्वर कोकिला श्रीमती उर्मिला पांडे तथा सुप्रसिद्ध लोकगीत गायक पंडित राजेश तिवारी की विशेष उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में लेखिका संतोष पटेरिया ने अपने साहित्यिक सफर, पुस्तक की रचना प्रक्रिया तथा उसमें समाहित विषयों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कृति बुंदेली भाषा, संस्कृति और लोकजीवन की भावनाओं को समर्पित है। उन्होंने बुंदेली साहित्य के संरक्षण और नई पीढ़ी तक उसकी समृद्ध विरासत पहुंचाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बहादुर सिंह परमार ने अपने संबोधन में बुंदेली भाषा की ऐतिहासिक समृद्धि, उसके शब्द-सौंदर्य और लोकजीवन से जुड़े गूढ़ अर्थों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है।

बुंदेली स्वर कोकिला श्रीमती उर्मिला पांडे ने लोकगीतों के माध्यम से बढ़ती अश्लीलता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नवोदित कलाकारों को बुंदेली संस्कृति, लोक परंपराओं और शुद्ध लोकगीतों को आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए, ताकि बुंदेली संगीत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सके।

इस अवसर पर डॉ. मुराद अली, जीवन ज्योति पटेरिया, राजीव शुक्ला, शिल्पी जैन सहित अन्य साहित्यप्रेमियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन राजू राजा सिंह चौहान ने किया।

कार्यक्रम साहित्य, संस्कृति और बुंदेली भाषा के संरक्षण के प्रति समर्पण का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।