सेवा और संस्कार के साथ मनाया 65वां जन्मदिन, बच्चों के बीच खुशियां बांटकर बने मिसाल
सेवानिवृत्त शिक्षक बलवान सिंह सोलंकी ने शिक्षा संस्कार केंद्र में केक काटा, शैक्षणिक सामग्री वितरित कर दिया प्रेरणादायी संदेश
संजय कलमोर
भैरूंदा। आज के दौर में जहां जन्मदिन समारोह अक्सर दिखावे तक सीमित हो जाते हैं, वहीं सेवानिवृत्त शासकीय शिक्षक बलवान सिंह सोलंकी ने अपना 65वां जन्मदिन समाजसेवा और मानवीय मूल्यों के साथ मनाकर एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने सिद्धपुर सेवा भारती द्वारा संचालित रानी दुर्गावती शिक्षा संस्कार केंद्र में बच्चों के बीच पहुंचकर उनके साथ जन्मदिन की खुशियां साझा कीं।
कार्यक्रम के दौरान बलवान सिंह सोलंकी ने बच्चों के साथ केक काटा, स्वल्पाहार कराया और उन्हें पेन, पेंसिल, कॉपी सहित अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित की। बच्चों के चेहरों पर आई मुस्कान ने पूरे आयोजन को भावनात्मक और यादगार बना दिया।
इस अवसर पर बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने शिक्षा का महत्व बताते हुए कहा कि "शिक्षा ऐसा धन है जिसे कोई चुरा नहीं सकता। ज्ञान ही व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाता है और जीवन में आगे बढ़ने का सबसे मजबूत आधार है।" उन्होंने बच्चों से अनुशासन, ईमानदारी और मेहनत के साथ अध्ययन करने का आह्वान किया।
उल्लेखनीय है कि बलवान सिंह सोलंकी ने लगभग 38 वर्षों तक शासकीय शिक्षक के रूप में सेवाएं दीं और वर्ष 2024 में सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे शिक्षा, संस्कार और सामाजिक गतिविधियों से लगातार जुड़े हुए हैं।
कार्यक्रम में बच्चों ने गीत, कविताएं और शुभकामना संदेश प्रस्तुत कर उनका स्वागत किया तथा पुष्पवर्षा कर जन्मदिन की बधाई दी। इस दौरान सत्येंद्र सिंह सोलंकी, देवेंद्र सिंह सोलंकी, दीपा सोलंकी, कंचन सोलंकी, राजेश लखेरा, मोहित दुबे, आरती दुबे, सोनू विश्वकर्मा और हर्ष राजपूत सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। वहीं सिद्धपुर सेवा भारती की ओर से नगर उपाध्यक्ष राधिका जैमिनी, शिक्षिका बबली शर्मा एवं सुनीता पंवार की विशेष उपस्थिति रही।
यह आयोजन केवल जन्मदिन का उत्सव नहीं, बल्कि समाज को सेवा, शिक्षा और संस्कार का सकारात्मक संदेश देने वाला प्रेरणादायी उदाहरण बन गया।


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