डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को कड़ी धमकी, परमाणु समझौते पर बातचीत नहीं की तो होगी तबाही

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान को कड़ी धमकी दी थी. उन्होंने कहा था कि अगर ईरान परमाणु समझौते पर बातचीत नहीं करता, तो उसे तबाही का सामना करना पड़ेगा. ये बयान साफ तौर पर बताता है कि अमेरिका ईरान पर दबाव बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा. अब, इस दबाव को और बढ़ाने के लिए, अमेरिका ने एक बड़ा सैन्य कदम उठाया है.
दरअसल वो USS Carl Vinson एयरक्राफ्ट कैरियर, जिस पर 2011 में अल कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन का शव समंदर में फेंका गया था, अब ईरान के आसपास अपनी ताकत दिखाने के लिए रवाना हो चुका है. इस युद्धपोत के बारे में दुनिया ने उस वक्त सुना था जब लादेन की “समुद्र में दफन” की खबर ने सुर्खियां बनाई थीं. अब वही जहाज एक बार फिर खबरों में है, लेकिन इस बार इसका मिशन ईरान पर दबाव डालना है.
आधुनिक हथियारों से लैस है ये जहाज
USS Carl Vinson का यह नया मिशन ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सैन्य शक्ति को मजबूत करने का हिस्सा है. इसके साथ पूरी Carrier Strike Group (CSG) भी भेजी जा रही है, जिसमें युद्धपोत के अलावा B2 स्टील्थ बॉम्बर जेट्स और Globemaster परिवहन विमान भी शामिल हैं. ये सभी अभी डिएगो गार्सिया बेस पर तैनात हैं, जो एक रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद अहम जगह है.
USS Carl Vinson, जिसे CVN-70 के नाम से भी जाना जाता है, अमेरिकी नौसेना का तीसरा Nimitz क्लास सुपरकैरियर है. इसकी ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें आधुनिक हथियारों की भरमार है. जैसे Mk 57 Mod13 Sea Sparrow Launchers, RIM-116 Rolling Airframe मिसाइल लांचर्स और Phalanx CIWS, जो किसी भी हमले से रक्षा करने में सक्षम होते हैं. इसके साथ कई गाइडेड मिसाइल क्रूजर और डिस्ट्रॉयर्स भी तैनात किए गए हैं, जो इसे और भी ताकतवर बनाते हैं.
कई बड़े मिशन को दिया अंजाम
USS Carl Vinson का इतिहास भी काफी दिलचस्प है. इसने पहले Operation Desert Strike, Operation Iraqi Freedom, और Operation Enduring Freedom जैसे कई अहम अभियानों में हिस्सा लिया है. इन अभियानों के दौरान इसने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ताकत का लोहा मनवाया है. अब यह जहाज फिर से उसी क्षेत्र में अपनी ताकत का एहसास दिलाने के लिए निकल पड़ा है.
ईरान भेजने की असल वजह ये है
इस सैन्य ऑपरेशन को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति का हिस्सा माना जा रहा है. इसका मकसद ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करने के लिए मजबूर करना है. साथ ही, अमेरिका हूथी विद्रोहियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की योजना बना रहा है, जिनके बारे में यह दावा किया जा रहा है कि उन्हें ईरान से समर्थन मिल रहा है. ट्रंप प्रशासन का यह कदम सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे मध्य पूर्व में राजनीतिक और सैन्य हलचलें तेज हो सकती हैं.