भोलेनाथ के इस मंदिर की अनोखी कहानी, जहां मन्नत पूरी होने पर भक्त चढ़ाते हैं झाड़ू-बैंगन, क्या है मान्यता
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में ऐसा शिव मंदिर है, जहां मनोकामना पूर्ण होने के बाद झाड़ू चढ़ाई जाती है. खीरी जिले में महाभारत कालीन कई ऐतिहासिक और पौराणिक शिव मंदिर हैं. मोहम्मदी से बरवर रोड पर प्राचीन पालन नाथ शिव मंदिर है. भगवान शिव की शिवलिंग की स्थापना महाभारत कालीन में की गई थी.
यह शिव मंदिर पालगांव में बना होने के कारण इसका नाम पालन नाथ मंदिर पड़ गया. यह एक ऐसा शिव मंदिर है, जहां मानी गई हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है. ऐसे में मनोकामना पूर्ण होने के बाद शिव भक्त यहां झाड़ू और बैंगन चढ़ाते हैं. काफी दूर-दूर से लोग भगवान भोलेनाथ की आराधना करने के लिए आते हैं. यहां सावन में सबसे अधिक भीड़ होती है.
क्या है मंदिर की कहानी?
मंदिर में स्थापित शिवलिंग महाभारत कालीन की है. कौरवों से जुए में हारने के बाद पांडवों को 12 वर्ष का वनवास और 1 वर्ष का अज्ञातवास भोगना पड़ा था. पांडवों ने अपना अज्ञातवास राजा विराट के राज्य में बिताया था. आज का बड़खर गांव महाभारत काल में राजा विराट के साम्राज्य का हिस्सा था. इसका नाम विराटनगर था, जो अब बड़खर हो गया.
सोमवार के दिन लगती है भारी भीड़
मंदिर परिसर में काफी वर्षों पूर्व एक समी का पेड़ लगा हुआ था, जो अब कट चुका है. इस पर पांडव अपने अस्त्र-शस्त्र रखते थे. मंदिर में काफी दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मुराद पूरी होने पर यहां दर्शन करने के लिए आते हैं. सोमवार को भी काफी दूर-दूर से लोग भगवान शिव की पूजा करने के लिए आते हैं.
वहीं महाशिवरात्रि को लेकर भी काफी दूर-दूर से लोग यहां रुद्राभिषेक करने के लिए आते हैं. मंदिर के महंत ने जानकारी देते हुए बताया कि जब कोई पशु बीमार हो जाता है, तो लोग यहां मंदिर में ताक पर नमक रख देते हैं. अगले दिन बीमार पड़े जानवर को नमक खिलाने से पशु ठीक हो जाता है.


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