न्यूयॉर्क। पश्चिम एशिया में पिछले पांच महीनों से जारी तनावपूर्ण माहौल का असर अब दुनियाभर के शेयर बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है, और अमेरिकी बाजार भी इससे अछूते नहीं हैं। सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार अपने हालिया रिकॉर्ड उच्च स्तर के करीब पहुंचने के बाद मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में गतिरोध को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण तेल की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक स्तर पर जहाजों की आवाजाही और कच्चे तेल के प्रवाह पर असर पड़ रहा है।

अमेरिकी बाजारों का हाल और प्रमुख कंपनियों का प्रदर्शन

कारोबार के अंत में एसएंडपी 500 (S&P 500) सूचकांक 0.1 प्रतिशत की हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ, जो पिछले शुक्रवार को बने अपने रिकॉर्ड स्तर से थोड़ा नीचे आया है। इसके अलावा, डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज में 133 अंक यानी 0.3 प्रतिशत की कमजोरी आई, जबकि नैस्डैक कंपोजिट में 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। फैक्टसेट के आंकड़ों के मुताबिक, बड़ी अमेरिकी कंपनियों का मुनाफा बढ़ने से शेयर बाजार को कुछ संबल जरूर मिला है; उदाहरण के लिए वॉरेन बफेट की कंपनी बर्कशायर हैथवे का शेयर 1.4 प्रतिशत चढ़ गया, जिससे एसएंडपी 500 को मजबूती मिली। इसके अलावा मरीनमैक्स और वैरेक्स इमेजिंग जैसी कंपनियों के शेयरों में भी जबरदस्त उछाल देखा गया। हालांकि, दूसरी ओर प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी) शेयरों में सुस्ती रही, जिसमें एनवीडिया 2.5 प्रतिशत, ऐपल 2 प्रतिशत और इंटेल 3.4 प्रतिशत तक लुढ़क गए।

तेल बाजार में उबाल और मुद्रास्फीति के आंकड़े

ऊर्जा बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 4.7 प्रतिशत की जोरदार छलांग लगाकर 87.50 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते की उम्मीदें धूमिल होने के कारण तेल की कीमतों में यह उछाल आया है। चूंकि महंगी ऊर्जा कीमतों से महंगाई (मुद्रास्फीति) बढ़ने का खतरा रहता है, इसलिए निवेशकों की निगाहें बुधवार को आने वाले नए मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर टिकी हुई हैं। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस बार मुद्रास्फीति दर पिछले महीने के 3.5 प्रतिशत से घटकर 3.4 प्रतिशत रह सकती है।

ब्याज दरों की स्थिति और वैश्विक रुख

महंगाई के मोर्चे पर थोड़ी राहत मिलने से अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है। हालांकि, हालिया कमजोर रोजगार रिपोर्ट के बाद बाजार में मिली-जुली प्रतिक्रिया है। सीएमई ग्रुप के अनुसार, सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बदलाव को लेकर निवेशकों में असमंजस की स्थिति है। उधर, 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.70 प्रतिशत हो गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मिला-जुला रुख देखते हुए जापान का निक्केई 225 सूचकांक 2.1 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।