शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स में 300 अंकों की गिरावट; निफ्टी 24,500 के नीचे
मुंबई: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को शुरुआती कारोबार के दौरान भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 320.14 अंकों की गिरावट के साथ 78,204.40 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 94.35 अंक टूटकर 24,490.85 पर पहुंच गया। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड 0.13 प्रतिशत की मामूली सुस्ती के साथ 87.61 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया शुरुआती कारोबार में 8 पैसे फिसलकर 95.38 के स्तर पर आ गया।
किन शेयरों में रही गिरावट और तेजी?
सेंसेक्स के पैक में शामिल इंटरग्लोब एविएशन, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारती एयरटेल, इटरनल और बजाज फाइनेंस जैसे दिग्गज शेयर नुकसान में कारोबार करते दिखे। इसके विपरीत, टाइटन, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा और इंफोसिस के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, भू-राजनीतिक तनावों ने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है, जिससे वॉल स्ट्रीट पर कमजोर रुख और एशियाई बाजारों में सुस्त शुरुआत देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान से मुआवजे की मांग और तेहरान के रुख ने बाजार में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है, जिसके चलते निवेशक अभी आक्रामक दांव लगाने से बच रहे हैं।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों का हाल
कारोबार के दौरान एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक हरे निशान में रहा, जबकि शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक नुकसान के साथ कारोबार कर रहे थे। इससे पहले अमेरिकी बाजार सोमवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे। विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल बाजार में 'इंतजार करो और देखो' की नीति हावी रह सकती है, और निकट अवधि में कच्चे तेल के ऊंचे दाम बाजार की तेजी पर ब्रेक लगा सकते हैं।
क्यों बढ़ रही हैं कच्चे तेल की कीमतें?
डब्ल्यूटीआई क्रूड तेजी से 82 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच रहा है, जबकि ब्रेंट क्रूड 87 डॉलर से ऊपर बना हुआ है। यह उछाल मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के पास आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं और अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे गतिरोध के कारण है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने का डर बना हुआ है।
विदेशी निवेशकों का रुख
अस्थिर माहौल के बावजूद एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को 1,974.76 करोड़ रुपये के शेयरों की लिवाली की थी। हालांकि, वैश्विक दबावों और तेल की कीमतों में तेजी के चलते मंगलवार को घरेलू बाजार पर बिकवाली का असर साफ दिखाई दिया।


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