कैदी,प्रहरी फिर भिड़े, नशीले पदार्थों की तस्करी से लेकर अफसरों के संरक्षण तक खुलेआम खेल

जेलर दिलीप सिंह जाटव के कार्यकाल में बढ़ती अव्यवस्थाएं, सफाई में कहा, छुटपुट घटना है 

छतरपुर। जिला जेल छतरपुर अब कानून और अनुशासन का घर नहीं, बल्कि दबंगई और तस्करी का गढ़ बनता जा रहा है। ताजा मामला उस समय सुर्खियों में आया जब सजायाफ्ता कैदी ने जेल आरक्षक के साथ मारपीट कर दी। जानकारी के अनुसार प्रहरी ने जेल में चल रही अवैध गतिविधियों का विरोध किया, जिससे नाराज़ कैदी ने उस पर हमला बोल दिया। हैरानी की बात यह है कि इस कैदी को जेल अफसरों का संरक्षण प्राप्त बताया जा रहा है।

पहले भी हो चुके विवाद–कैदी बचा,प्रहरी सज़ा पाया

यह कोई पहला मौका नहीं है। कुछ समय पहले भी कैदी और प्रहरी नीरज जाटव के बीच प्रतिबंधित सामग्री को लेकर विवाद और मारपीट हुई थी। लेकिन कार्रवाई कैदी पर नहीं, बल्कि प्रहरी पर हुई और उसे निलंबित कर दिया गया। यह घटनाक्रम जेल प्रशासन की कार्यशैली और पक्षपात को उजागर करता है।


जेल के अंदर गांजा और नशे का कारोबार

सूत्रों की मानें तो छतरपुर जेल के भीतर गांजा और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी लगातार जारी है। यह तस्करी तभी संभव है जब अफसरों का संरक्षण प्राप्त हो। चर्चाओं में यह भी है कि रसूखदार और बदमाश किस्म के कैदी इस नेटवर्क का बड़ा हिस्सा है और अफसरों के इशारे पर उसकी दबंगई को छूट मिल रही है।

जेलर बोले‐मामला बड़ा नहीं

जब इस पूरे मामले पर जेलर दिलीप सिंह जाटव से सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे साधारण घटना करार देते हुए कहा –यह एक छुटपुट घटना है, ज्यादा कोई बड़ा मामला नहीं है। जांच की जा रही है।
जेलर का यह बयान कैदियों और तस्करी की गंभीर गतिविधियों को हल्के में लेने जैसा प्रतीत होता है।

जेल में अराजकता पर उठे सवाल

लगातार हो रही घटनाओं ने छतरपुर जेल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रहरी और कैदियों की सुरक्षा खतरे में है, जबकि कानून-व्यवस्था पर अफसरों की मिलीभगत का साया मंडरा रहा है। अब देखना यह है कि क्या शासन-प्रशासन इस अराजकता पर नकेल कस पाएगा या फिर जेल माफियाओं का यह खेल ऐसे ही चलता रहेगा।