नई दिल्ली: वैश्विक राजनीति के परिदृश्य में भारत की बढ़ती धमक एक बार फिर दुनिया के सामने होगी, जब देश की राजधानी नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक का आगाज होगा। आगामी 14 और 15 मई, 2026 को आयोजित होने वाली इस बैठक की मेजबानी भारत कर रहा है, क्योंकि इस वर्ष ब्रिक्स की कमान भारत के हाथों में है। भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इस उच्च स्तरीय बैठक का नेतृत्व करेंगे। इस बार का सम्मेलन 'BRICS@20' की विशेष थीम पर आधारित है, जिसमें भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार, आपसी सहयोग और टिकाऊ विकास जैसे मौलिक मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।

द्विपक्षीय वार्ता से मजबूत होंगे आपसी रिश्तों के तार

मुख्य सम्मेलन शुरू होने से ठीक पहले नई दिल्ली में कूटनीतिक बैठकों का सिलसिला शुरू हो चुका है। आज, 13 मई 2026 को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर कई प्रभावशाली देशों के विदेश मंत्रियों के साथ आमने-सामने की बातचीत करेंगे। इन मुलाकातों में रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, चिली और मालदीव जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा होगी। इसी महत्वपूर्ण कड़ी में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची भी बुधवार को दिल्ली पहुंच रहे हैं, जिससे इस सम्मेलन की अहमियत और अधिक बढ़ गई है। इन व्यक्तिगत मुलाकातों का उद्देश्य न केवल आपसी भरोसा बढ़ाना है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर एक साझा सहमति बनाना भी है।

विस्तारित ब्रिक्स और वैश्विक शासन में बदलाव की तैयारी

ब्रिक्स समूह अब केवल पांच देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका स्वरूप पहले से कहीं ज्यादा व्यापक और वैश्विक हो गया है। हाल के वर्षों में मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के शामिल होने से इस संगठन की ताकत में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इस बैठक में एक विशेष सत्र वैश्विक शासन प्रणाली (ग्लोबल गवर्नेंस) में जरूरी सुधारों पर भी रखा गया है, जो विकासशील देशों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और अधिक मजबूती देने का काम करेगा। इसके साथ ही बेलारूस, मलेशिया और वियतनाम जैसे कई अन्य पार्टनर देश भी इस बढ़ते कुनबे का हिस्सा बनकर वैश्विक संतुलन में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

चौथी बार मेजबानी कर विश्व पटल पर भारत की नई पहचान

यह भारत के लिए अत्यंत गौरव का विषय है कि वह चौथी बार इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय समूह की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले भारत ने साल 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता का उत्तरदायित्व कुशलतापूर्वक निभाया था। साल 2026 में एक बार फिर मिली यह जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती साख और उसके नेतृत्व पर दुनिया के भरोसे का प्रमाण है। यह आयोजन न केवल सदस्य देशों के बीच आर्थिक और सामाजिक सहयोग के नए द्वार खोलेगा, बल्कि भारत को एक बार फिर से 'ग्लोबल साउथ' की सशक्त आवाज के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा।