ब्रिटिश प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान स्कॉच व्हिस्की का दबदबा, भारतीय बाजार में बढ़ेगा कंजम्प्शन
व्यापार: ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर बुधवार को भारत की दो दिवसीय यात्रा शुरू कर रहे हैं। उनकी इस यात्रा के दौरान ब्रिटेन का स्कॉच व्हिस्की सुर्खियों में है। दरअसल ब्रिटेन के स्कॉच व्हिस्की उद्योग को भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। ब्रिटिश सरकार को उम्मीद है कि इससे स्कॉटलैंड की अर्थव्यवस्था में सालाना 19 करोड़ पाउंड की वृद्धि होगी।
भारतीय बाजार में बढ़ेगी स्कॉच व्हिस्की की खपत
स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन के सदस्य और व्हिस्की के उत्पादक भी ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ भारत आने वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। दोनों देशों के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुक्ल कम करेगा, जिससे स्कॉच व्हिस्की की खपत भारतीय बाजार में बढ़ सकती है। अनुमान है कि भारत में व्हिस्की की सालाना करीब 1 अरब पाउंड की बिक्री बढ़ेगी, जिससे ब्रिटेन में 1,000 से ज्यादा नए रोजगार पैदा होंगे।
स्कॉच व्हिस्की उत्पादक खुश
स्कॉटलैंड के लिए ब्रिटेन के विदेश मंत्री डगलस अलेक्जेंडर ने कहा, 'इस साल ब्रिटेन सरकार द्वारा भारत के साथ किया गया ऐतिहासिक व्यापार समझौता स्कॉटलैंड और विशेष रूप से हमारे व्हिस्की उद्योग के लिए बहुत अच्छी खबर है; लेकिन इस समझौते को हासिल करने के बाद, अब हमारी चुनौती और जिम्मेदारी इस समझौते को अमल में लाना है'। स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क केंट ने कहा, 'भारत को हमारे सभी निर्यातों पर आयात शुल्क में कमी से आने वाले वर्षों में दुनिया के सबसे बड़े व्हिस्की बाजार तक हमारी पहुंच खुलेगी और भारतीय उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प मिलेंगे।'
भारत-ब्रिटेन के द्विपक्षीय व्यापार में होगी 25 अरब पाउंड की बढ़ोतरी
डगलस अलेक्जेंडर ने ब्रिटिश पीएम के भारत दौरे को लेकर कहा 'भारत के साथ यह समझौता लंबी अवधि में उद्योग जगत के लिए परिवर्तनकारी साबित हो सकता है। इस व्यापार मिशन पर, हम स्कॉटलैंड के लिए इस महत्वपूर्ण व्यापार समझौते से मिलने वाले अवसरों का पूरा लाभ उठाने की कोशिश करेंगे।' ब्रिटिश सरकार के विश्लेषण से पता चलता है कि इस समझौते से द्विपक्षीय व्यापार में 25.5 अरब पाउंड की वृद्धि होगी, ब्रिटेन के सकल घरेलू उत्पाद में 4.8 अरब पाउंड की वृद्धि होगी, तथा दीर्घावधि में प्रति वर्ष मजदूरी में 2.2 अरब पाउंड की वृद्धि होगी।


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